दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो व्यक्ति हर वह कार्य कर सकता है, जो वह करना चाहता है। ऐसा ही मामला गौहरीमाफी के टिहरी फार्म में देखने को मिला। जहां 12 महिलाओं और 6 पुरुषों ने खुद श्रमदान कर क्षतिग्रस्त पुलिया और मार्ग बना दिया। इन लोगों ने पुलिस निर्माण के लिए नेताओं के साथ ही संबंधित महकमे के अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई। ज्ञापन दिया। लेकिन, आश्वासन के बगैर उन्हें कुछ नहीं मिला। जिससे आजिज आकर उन्होंने खुद ही क्षतिग्रस्त पुलिया और मार्ग बनाने का निर्णय लिया। इतना ही नहीं दो दिन पुलिया और सड़क बनाकर तैयार भी कर दी।
गौहरीमाफी स्थित टिहरी फार्म के ग्रामीणों ने बदहाल तीन मीटर पुलिया और 15 मीटर मार्ग को श्रमदान कर बना डाला। प्राथमिक स्कूल जाने वाले मार्ग की मीटर पुलिया लंबे समय से क्षतिग्रस्त थी। ग्रामीणों ने जन प्रतिनिधियों से लेकर विभाग के अधिकारियों तक, सभी से क्षतिग्रस्त पुलिया निर्माण के लिए गुहार लगाई। जनप्रतिनिधि जहां कोरे आश्वासन देते रहे। वहीं, संबंधित विभाग के अधिकारी बजट न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ते रहे।
झुलसा देने वाली गर्मी में क्षेत्र की महिलाओं ने दो किलोमीटर दूर से सिर पर रेत और पत्थर ढोकर श्रमदान किया। परिणाम क्षतिग्रस्त पुलिया और सड़क बनकर तैयार हो गई।
आरटीआई कार्यकर्ता देेवेंद्र सेमवाल बताते हैं कि प्राथमिक स्कूल जाने वाले मार्ग पर करीब तीन साल से पुलिया क्षतिग्रस्त थी। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों के साथ ही दोपहिया चालक अक्सर बदहाल नाले में गिरकर चोटिल होते थे।
इन लोगों ने किया श्रमदान
सुनीता न्यूली, पुष्पा देवी, मकानी देवी, शाखा देवी, जयश्वरी देवी, राधा देवी ने सिर में रेत, पत्थर ढोकर श्रमदान किया। वहीं, देव सिंह, शूरवीर रावत, देवानंद उनियाल, राकेश नेेगी आदि ने पुलिया की खुदाई आदि कार्य किया।