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भारतीय जन जीवन को समृद्ध करती है गंगा: प्रेमचंद

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ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती । जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत नमामि गंगे पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। मुनिकीरेती स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम के गंगा रिसोर्ट सभागार हॉल में आयोजित संगोष्ठी का विधान सभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, नगर पालिका अध्यक्ष रोशन रतूड़ी नमामि गंगे के निदेशक उदयराज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस मौके पर विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि गंगा की सांस्कृतिक विविधता का पता इस बात से चलता है कि गंगा के किनारे 62 धुनें, 254 प्रकार के गीत एवं नाटक, 122 नृत्य शैलियां, 200 शिल्प, लोक चित्रकला की 12 शैलियों और 26 भाषाएं एवं बोलियां पाई जाती हैं। गंगा भारतीय जन जीवन को समृद्ध करती है इसलिए गंगा भारत का प्रतीक है।
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मां गंगा के प्रति यहां के मानव का भाव मां के तुल्य है। इसलिए गंगा नदी नहीं गंगा मैया हैं। गंगा की स्वच्छता व निर्मलता के लिए हम सब को कार्य करने की नितांत आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मां गंगा की निर्मलता के लिए जो संकल्प लिया है। वह एक दिन हम सब के सहयोग से सफल हो जाएगा। इसके लिए हमें गंगा की स्वच्छता व निर्मलता को बनाए रखने के लिए संकल्प लेना होगा। पर्यावरणविद चंड़ी प्रसाद भट्ट ने कहा कि मोक्षदायिनी मां गंगा की स्वच्छता व निर्मलता को बनाए रखने के लिए हम सब को मंथन करना होगा। आने वाले कुंभ मेले तक मां गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने का प्रयास किया जाएगा।
15 शहरों में चल रहा गंगा स्वच्छता अभियान
नमामि गंगे के निदेशक उदय राज ने कहा कि परियोजना के तहत निर्मल गंगा के लिए जो कदम उठाए गए हैं उसके परिणाम दिखने लगे हैं। लघु अवधि के अंतर्गत नालों का ट्रीटमेंट, एसटीपी, स्नान व शमशान घाटों का निर्माण किया जा रहा है। उत्तराखंड में गंगा नदी के किनारे स्थित 15 शहरों को प्राथमिकता के आधार पर इस योजना के अंतर्गत चयनित किया गया है। इसमें बद्रीनाथ, जोशीमठ, गोपेश्वर, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, गोचर, कीर्तिनगर, मुनिकीरेती, ऋषिकेश, हरिद्वार शामिल हैं। इस अवसर पर मेयर अनिता ममगाईं, नगर पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी, नरेंद्र सिंह नेगी, पीएस राणा, भूपेंद्र कुमार, मनोज द्विवेदी, चंद्रवीर पोखरियाल, डा. राम विनय, डा.सर्वेश उनियाल, महेश डोभाल, मोहन नैथानी, विजयपाल सिंह, मनोज गुप्ता आदि मौजूद थे।
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परिचर्चा -
- नमामि गंगे के तहत अलग मंत्रालय तक का गठन कर लिया गया है लेकिन राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता मिशन अब तक कितना सफल हुआ है। इस पर मंथन करने की आवश्यकता है। चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार ऋषिकेश में अभी तक गंगा में प्रभावित हो रहे गंदे नाले अभी भी सीधे गंगा में प्रभावित होकर गंगा के निर्मल जल को प्रदूषित कर रहे हैं।
- सूर्यचंद चौहान समाजिक कार्यकर्ता मुनिकीरेती

- गंगा स्वच्छता के लिए स्थानीय संगठन अपने स्तर पर अभियान चलाकर गंगा तटों की साफ सफाई करते हैं लेकिन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। मुनिकीरेती कुंभ मेला पार्किंग के समीप गंगा तट पर बने श्मशान घाट पर खुलेआम चिता जलाई जा रही है, जो गंगा को प्रदूषित कर रही है। आज तक यहां पर श्मशान घाट नहीं बन पाया।
- निर्मला उनियाल मुनिकीरेती ढालवाला

- राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने आज तक क्षेत्र में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए क्या कार्य किए हैं? जमीनी स्तर पर इसका कुछ भी पता नहीं चल रहा है। गंगा स्वच्छता के लिए स्थानीय स्तर प्रयास हो रहे हैं, जबकि नमामि गंगे के तहत गंगा स्वच्छता के लिए करोड़ों का बजट केंद्र सरकार खर्च कर चुकी है। लेकिन गंगा स्वच्छता की ओर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है।
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- सीमा बिजल्वाण निवासी ढालवाला
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