फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कभी खास थे, अब बन गए औपचारिक

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
विज्ञापन

डोईवाला। देश की आजादी में संघर्ष के साझी रहे आजाद हिंद फौज के सिपाही साधू सिंह बिष्ट उम्र के 98वें साल में भी देशहित के लिए कुछ करने का जज्बा रखते हैं। साधू सिंह के अनुसार संसद में हंगामे की प्रवृत्ति त्यागकर गंभीरता से देश के लिए सार्थक चिंतन करना ही गणतंत्र के असली मायने हैं।
डोईवाला प्रखंड के एकमात्र स्वतंत्रता सेनानी साधू सिंह बिष्ट (98) नगर पालिका डोईवाला के बारूवाला कान्हरवाला में निवास करते हैं। क्षेत्र में वे एकमात्र जंगे आजादी के पुरोधा हैं। फिलहाल वे सामाजिक कुरीतियों और राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर हैं। इसके अलावा राज्य में स्वतंत्रता सेनानियों को वाजिब सम्मान नहीं मिलने से भी नाराज हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

बकौल साधू सिंह बिष्ट वर्तमान में गणतंत्र के असल मायने गौण हो गए हैं। देश की नीति निर्धारक संसद में हंगामे और औपचारिकता की प्रवृत्ति हावी हो गई है। देश के शुभचिंतकों और राजनीतिज्ञों को हंगामे की प्रवृत्ति त्यागकर देश के लिए गंभीरता से सार्थक चिंतन करने की जरूरत है। साधू सिंह बिष्ट बताते हैं कि आजादी के लिए अपना सर्वस्व हवन करने वाले महापुरुषों को केवल सरकारी औपचारिकताओं में ही रखा जाता है। मौजूदा परिस्थितियों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी हाशिए पर हैं। राज्य निर्माण बेहतर कदम रहा, लेकिन सरकारें अब तक राज्य निर्माण की परिकल्पना की सार्थकता पूरी नहीं कर सकी हैं। उन्होंने राजनेताओं से देशहित में चिंतन करने का आह्वान किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें