यदि मौसम ने साथ दिया तो केदारनाथ व हेमकुंड साहिब के बाद अब बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा भी अक्तूबर पहले सप्ताह से शुरु हो सकती है।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऋषिकेश से विष्णुप्रयाग (276) तक बिना वाहनों की अदला-बदली के विष्णुप्रयाग तक पहुंचा जा सकता है।
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हनुमान चट्टी
इन दिनों विष्णुप्रयाग में अलकनंदा नदी पर मोटर पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। यदि यह पुल निर्मित हो जाता है तो यहां से एक किमी की सड़क कटिंग फिर होनी है, जो हाईवे को हनुमान चट्टी से मिला देगा।
जबकि इससे आगे बदरीनाथ तक हाईवे सही हालत में है। ऐसे में मौसम ने साथ दिया तो अक्तूबर पहले सप्ताह से बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा भी शुरु हो सकती है।
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वाहनों की आवाजाही शुरु
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कमांडर कर्नल निलेश चंदाराना का कहना है कि विष्णुप्रयाग में एक सप्ताह के भीतर वाहन पुल निर्मित कर दिया जाएगा। इसके बाद सिर्फ एक किमी सड़क निर्माण होना है, जिससे बदरीनाथ तक छोटे वाहनों की आवाजाही शुरु कर दी जाएगी।
बदरीनाथ में सबकुछ ठीक-ठाक
दैवी आपदा से बदरीनाथ धाम पर कोई असर नहीं पड़ा है। बदरीनाथ मंदिर के पीछे चट्टान पर हुए भूस्खलन को भी सिंचाई विभाग द्वारा सीमेंट वर्क से ठीक कर दिया गया है।
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पिछले एक माह से बारिश कम होने से अलकनंदा नदी के जलस्तर में भी कमी आई है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह का कहना है कि बदरीनाथ राष्ट्रीय राजामार्ग की स्थिति सुधरती है तो आगामी अक्तूबर माह के पहले सप्ताह से बदरीनाथ की तीर्थयात्रा शुरु हो जाएगी। यात्रा शुरु होती है तो धाम में रहने, खाने की कोई दिक्कत नहीं है।
बदरीनाथ में ठंड ने दी दस्तक
बदरीनाथ धाम में ठंड ने दस्तक दे दी है। यहां सुबह-सांय बर्फीली हवाएं चलने लगी हैं, जिससे ठंड बढ़ गई है। धाम में रह रहे पंडा पंचायत के लोग, धर्माधिकारी व वेदपाठी बदरीनाथ धाम में सुबह से सांय तक पूजा-अर्चना संपन्न कर अपने कमरों में दुबक जा रहे हैं।
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अक्तूबर माह से ऊंची चोटियों पर बर्फबारी शुरु हो जाने के बाद यहां तापमान में भारी गिरावट शुरु हो जाती है, जिससे यहां तीर्थयात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बदरीनाथ की पूजा-अर्चना में ग्रामीण
धाम में पिछले तीन माह से तीर्थयात्रियों की भीड़भाड़ तो नहीं है, लेकिन यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना संचालित हो रही हैं। देश के अंतिम गांव माणा और बामणी गांवों के ग्रामीण सुबह-सांय बदरीनाथ की पूजा-अर्चना में लगे हुए हैं।
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माणा गांव की महिलाएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा में प्रतिदिन बदरीनाथ धाम में मत्था टेकनी पहुंच रही हैं। माणा और बामणी गांवों के लोग बदरीनाथ को अपना अराध्य देव मानते हैं। यहां मौजूद माता मूर्ति, धंटाकर्ण, सरस्वती नदी, व्यास गुफा, शेषनाग और शिव मंदिर में स्थानीय श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है।