प्राकृतिक आपदा के बाद वीरान पड़े प्रसिद्ध केदारनाथ धाम मंदिर में जल्दी ही पूजा-अर्चना शुरू होगी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ धाम के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपाननंद सरस्वती को मंदिर में जल्द पूजा शुरु करने का आश्वासन दिया है।
बहुगुणा ने दिल्ली में शंकराचार्य से मुलाकात कर केदारनाथ में पूजा को लेकर लंबी चर्चा की। इस दौरान शंकराचार्य ने केदारनाथ में लिंगायत पुजारी के स्थान पर किसी वैदिक हिंदू पुजारी को नियुक्त करने को भी कहा।
बताया जाता है कि केदारनाथ पुजारी विवाद को लेकर सरकारी रवैये से नाखुश शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से भेंट करके उन्हें संतुष्ट करने का निर्देश कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को दिया, उसके बाद बहुगुणा उनसे मिलने पहुंचे।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के निकटवर्ती सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मंगलवार को शंकराचार्य से मुलाकात की।
पिछले कुछ दिनों से तबियत बिगडऩे के कारण शंकराचार्य दक्षिण दिल्ली के एक अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। बहुगुणा वहीं उनसे आकर मिले। इस दौरान दोनों के बीच केदारनाथ और उत्तराखंड के अन्य तीर्थ स्थलों के पुनर्निर्माण को लेकर लंबी चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक शंकराचार्य ने कहा कि श्रावण मास शुरु हो चुका है और इस महीने में निर्जन से निर्जन शिव मंदिर में भी पूजा अर्चना होती है, जबकि केदारनाथ तो द्वादश ज्योर्तिलिंगों में प्रमुख है। इसलिए वहां जल्दी से जल्दी पूचा शुरु होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने जब वहां की जटिल परिस्थितयों का हवाला देकर विलंब की बात कही, तो शंकराचार्य ने कहा कि जिस तरह वहां निर्माण सामग्री और मजदूर पहुंचाए गए हैं, उसी तरह हेलीकॉप्टर से पुजारी और पूजा सामग्री पहुंचाकर यथाशीघ्र पूजा शुरु कराई जाए। बहुगुणा ने आश्वासन दिया कि वह जल्दी से जल्दी इसे करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि शंकराचार्य ने केदारनाथ मंदिर में लिंगायत पुजारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब लिंगायत खुद को हिंदू नहीं मानते और वेद मंत्रों का उच्चारण नहीं करते तो भगवान शिव की पूजा उनसे कराना उचित नहीं है।
तब मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने लंबे समय से लिंगायत पुजारी वहां पूजा कर रहे है, इसलिए इस मुद्दे पर काफी विचार विमर्श के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि यह भी जांच का विषय है कि इतने लंबे समय से लिंगायत पुजारी बिना वैदिक ऋचाओं से केदारेश्वर भगवान शिव का अभिषेक कैसे कर रहे हैं।