पिथौरागढ़ के डुंगरी गांव में प्याज और लहसुन के नई प्रजाति की जानकारी लेते किसान
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जिले के किसानों को अब प्याज और लहसुन की नई प्रजाति के बीज मिलेंगे। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा ने किसानों की जरूरत को देखते हुए प्याज की वीएल-3 और लहसुन की वीएल-2 प्रजाति तैयार की है। इस प्रजाति के बीजों का उत्पादन निधि संस्था के सहयोग से जाखनी, डुंगरी, बालाकोट, बड़ावे, गाड़गांव में उत्पादन किया जा रहा है।
विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डा. निर्मल हेड़ाऊ ने बताया कि पूरे प्रदेश में चार हजार हेक्टेयर में प्याज और लहसुन की खेती की जाती है। इसके लिए कम से कम 300 क्विंटल बीज की जरूरत होती है। पर्वतीय अंचल में किसान अक्सर प्याज और लहसुन के बीज के लिए परेशान रहते हैं। डा. निर्मल ने कहा कि नई प्रजाति के बीज ज्यादा उत्पादन देते हैं और इनके बीजों के खराब होने की संभावना भी कम रहती है।
किसानों को बीज तैयार करने के तरीके बताए जा रहे हैं और उनको तकनीकी सहयोग भी दिया जा रहा है। डुंगरी गांव में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्होंने किसानों को बीज तैयार करने की विधि बताई। निधि संस्था के डा. सुनील पांडे ने कहा कि भविष्य में प्याज और लहसुन के बीज की कमी नहीं रहेगी। इस दौरान संजय महर, राजेंद्र महर, दीवान सिंह, लक्ष्मण सिंह, राजेश मेहता समेत 35 काश्तकार शामिल हुए।