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बांसबगड़ की 8 हेक्टेअर भूमि को पानी का इंतजार 

Mon, 27 Feb 2017 10:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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बांसबगड़ की 8 हेक्टेअर भूमि को पानी का इंतजार  - फोटो : अमर उजाला
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बांसबगड़ में बिन पानी सब सून वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। पिछली बरसात में बांसबगड़ गांव की 8 हेक्टेअर भूमि की सिंचाई करने वाली नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। नहर क्षतिग्रस्त होने से फसलों के साथ ही सब्जी की खेती प्रभावित हुई है। गांव के 35 परिवारों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। आपदा के एक साल बाद भी नहर की मरम्मत नहीं हुई।
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बांसबगढ़ के 35 परिवार 8 हेक्टेअर क्षेत्र में धान, गेहूं की फसल के साथ ही सब्जियों का उत्पादन करते है। सालभर खाने का राशन किसानों को मिल जाता था। सब्जियां बाजार में बेचते थे। पिछले साल जून, जुलाई की आपदा बांसबगड़ के किसानों पर कहर बनकर टूटी। खेतों को सिंचित करने वाली नहर जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई। नहर में एक किमी  दूर से पानी आता है। गांव के लोगों को उम्मीद थी कि बरसात थमने के बाद आपदा मद से नहर की मरम्मत हो जाएगी। सिंचाई विभाग ने भी गांव के लोगों को  यही उम्मीद दिलाई थी लेकिन गांव के लोगों की यह उम्मीद अब तक पूरी नहीं  हुई। खेतों को पानी न मिलने से फसल और सब्जी उत्पादन ठप हो गया है। किसानों  को बाजार से राशन, सब्जी खरीदनी पड़ पही है। 

तमाम कोशिशों के बाद भी जब सिंचाई विभाग ने नहर की मरम्मत नहीं की तो ग्रामीणों ग्रामीमों ने स्वयं  नहर की मरम्मत का प्रयास किया लेकिन नहर का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीण इसमें कामयाब नहीं हो पाए। ग्राम प्रधान दीपा देवी कहती  हैं कि नहर की मरम्मत के लिए धन न देकर ग्राम पंचायत के लोगों के साथ अन्याय किया गया है। लोग खेती से वंचित हो गए हैं। गरीब किसानों को खाने तक  के लाले पड़ रहे हैं। जल्द से जल्द नहर की मरम्मत की जानी चाहिए। 
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जिले  में 53 नहरों को आपदा के दौरान क्षति पहुंची है। आपदा मद से धनराशि मांगी  गई है। धन मिलते ही नहर की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा। 
पीके दीक्षित अधीक्षण अभियंता सिंचाई पिथौरागढ़
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