बुधवार शाम को जब तेज आवाज के साथ डम्डे ग्राम पंचायत के टोडिल गांव में बादल फटा और गांव के पश्चिम की पहाड़ी से विशाल नाला गांव की ओर बढ़ने लगा तो 2013 की केदारनाथ त्रासदी जैसे मंजर को सामने देख लोग सिहर उठे और भयभीत होकर इधर, उधर भागने लगे।
गांव के लोग उस मंजर को याद कर अभी भी कांप उठते हैं। रामगंगा के नजदीक बसे गांव के लोग बताते हैं कि शाम को करीब चार बजे बाद बारिश के बीच गांव के पश्चिम में स्थित पहाड़ी में पीले रंग का उजाला हो गया। एक जोरदार आवाज हुई और पहाड़ी खिसकने लगी। गांव की ओर मलबा आता देख लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। ग्रामीण बताते हैं कि दो किमी दूर से आया पानी और मलबा चंद मिनट में ही गांव में प्रवेश कर गया।
लोगों के सामने ही उनके खेत और घर मलबे से पटने लगे। बलवीर प्रसाद पुत्र तिल राम का निर्माणाधीन शौचालय, स्नानागार और एक बकरी मलबे के साथ बह गई। खुशाल राम पुत्र तिल राम का मकान क्षतिग्रस्त हो गया। मालती देवी पत्नी भगीरथ राम, राधेश्याम, अंगद राम, प्रेम चंद्र पुत्र तेज राम, बसंत कुमार पुत्र तेज राम, दिगंबर राम पुत्र तेज राम, हीरा लाल पुत्र तेज राम, गीता देवी पत्नी प्रेम राम के घरों में पानी और मलबा घुस गया। लोगों की आजीविका का साधन केले, आम का बाग उजड़ गया।