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Pithoragarh News: खटारा बसें ले रहीं यात्रियों की जान, नहीं लिया जा रहा है संज्ञान

Thu, 04 Jun 2026 10:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ में रोडवेज वर्कशॉप में खड़ीं पुरानी बस जिसकी बदहाली  साफ नजर आ रही है। संवाद
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पिथौरागढ़। रोडवेज की खटारा बसें हादसे का कारण बनकर यात्रियों की जान ले रही हैं। इसके बाद भी इनका बेखौफ संचालन हो रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिथौरागढ़ डिपो उम्र और मानक पूरा कर चुकीं 15 बसों को पहाड़ की सड़कों पर दौड़ाकर यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है। खटारा बसों के संचालन से पूर्व में सीमांत जिले में दो बड़े हादसे हो चुके हैं जिनमें 71 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
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नियमों के मुताबिक, खरीद के सात साल या सात लाख किलोमीटर का सफर तय करने के बाद किसी भी बस का संचालन पहाड़ की सड़कों पर नहीं किया जा सकता। ऐसा करना नियमों के साथ ही यात्रियों की सुरक्षा के खिलाफ है। हैरानी है कि पिथौरागढ़ डिपो के बेड़े में शामिल 63 में से 15 बसें ऐसी हैं जो अपनी उम्र पार करने के बाद भी सड़कों पर दौड़ रही हैं।
पूर्व में भी खटारा बसों के संचालन से जिले में कभी न भूलने वाले हादसे हुए हैं। जून 1997 में दिल्ली से 52 यात्रियों को लेकर लौट रही खटारा बस में अचानक तकनीकी खराबी आई। बस अनियंत्रित होकर 200 मीटर नीचे सरयू नदी में गिर गई। इस हादसे में 51 लोगों को काल के गाल में समाना पड़ा। इस हादसे को याद कर आज भी लोग सिहर उठते हैं।
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दिल्ली रूट पर संचालित बस के खाई में गिरने से इस स्थान को आज दिल्ली बैंड के नाम से पहचाना जाता है। यह घटना जिले में अब तक सबसे बड़े हादसे में शुमार है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी सिस्टम नहीं चेत रहा है और पुरानी खटारा बसों का संचालन आज भी किया जा रहा है।

1975 में नैनीपातल में हुए बस हादसे में 25 की गई थी जान
वर्ष 1975 में धारचूला हाईवे पर नैनीपताल में भीषण बस हादसा हुआ था। नैनीपताल, सिरड़ के कई लोग शवयात्रा में शामिल होकर रोडवेज बस से लौट रहे थे। घर से सिर्फ तीन किलोमीटर पहले ही पुरानी खटारा बस खाई में गिर गई थी। इस हादसे में दोनों गांवों के 25 लोगों की मौत हो गई थी। तब भी बस में आई तकनीकी खामी हादसे का कारण बनी थी।

परिवहन विभाग भेज चुका है पुरानी खटारा बसों को बदलने का पत्र
परिवहन विभाग यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहीं पुरानी-खटारा बसों को बदलने के लिए कई बार निगम को पत्र भेज चुका है। विभाग भी मानता है कि पुरानी-खटारा बसों को पहाड़ी सड़कों पर दौड़ाना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है। इसके बाद भी निगम इन बसों को बदलने के लिए गंभीरता नहीं दिखा रहा है। ऐसे में डिपो के लिए खटारा बसों को ही दौड़ाना मजबूरी बना हुआ है।
कोट
रोडवेज बसों की फिटनेस की समय-समय पर जांच होती है। परिवहन विभाग कई बार पुरानी-खटारा बसों को बदलने के लिए निगम को पत्र भेज चुका है। डिपो को नई बसें उपलब्ध कराना निगम की जिम्मेदारी है। - शिवांश कांडपाल, एआरटीओ, पिथौरागढ़
कोट
डिपो को समय-समय पर नई बसें मिल रही हैं। उम्र पार कर चुकीं कुछ पुरानी बसों को टनकपुर भेजने की प्रक्रिया गतिमान है। इनकी जगह नई बसों की मांग भेजी गई है। - रवि शेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़ डिपो
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