नाचनी (पिथौरागढ़)। हरड़िया नाले से आए मलबे के कारण रामगंगा नदी में बनी कृत्रिम झील का जलस्तर कम करने के लिए मलबा हटाने का कार्य मंगलवार को शुरू हो गया। पोकलैंड मशीन में आई तकनीकी खराबी दूर होने के बाद सिंचाई विभाग की निगरानी में सुबह से देर शाम तक अभियान जारी रहा। अभी प्रवाह सामान्य नहीं हो सका है और झील का जलस्तर भी अपेक्षित रूप से कम नहीं हुआ है।
बीते दिनों हरड़िया नाले से आए भारी मलबे ने रामगंगा नदी का प्रवाह अवरुद्ध कर दिया था जिससे करीब एक किलोमीटर लंबी कृत्रिम झील बन गई। इसके चलते नदी किनारे बसे बासगून, छीपा, भैंसखाल और नाचनी बाजार सहित निचले क्षेत्रों पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं, बागेश्वर जिले के काभड़ी गांव में भी झील बनने के कारण भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार जहां मलबा जमा है वहां नदी का मार्ग काफी संकरा है। ऐसे में पोकलैंड मशीन के धंसने या असंतुलित होने का खतरा बना हुआ है। इसी कारण कृत्रिम झील के मुहाने से अत्यंत सावधानी के साथ मलबा हटाया जा रहा है ताकि झील का पानी अचानक न टूटे और कोई बड़ा हादसा न हो। विभाग का कहना है कि झील को पूरी तरह कब तक खोला जा सकेगा यह मौजूदा परिस्थितियों और कार्य की प्रगति पर निर्भर करेगा।
बारिश थमने से राहत, अभियान में आई तेजी
पिछले कुछ दिनों से बारिश थमने के कारण रामगंगा नदी का जलस्तर घटा है, जिससे कृत्रिम झील पर दबाव नहीं बढ़ रहा है। अनुकूल मौसम के चलते सिंचाई विभाग की टीम को राहत मिली और पूरे दिन मलबा हटाने का कार्य सुचारु रूप से चलता रहा।
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रामगंगा नदी में बनी झील से मलबा हटाने का काम शुरू हो गया है। मलबा हटाने में जल्दबाजी करने से खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में पौकलैंड मशीन से सावधानीपूर्वक कृत्रिम झील के मुहाने को खोलने का कार्य किया जा रहा है।
एसएस बिष्ट, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, मुनस्यारी