पिथौरागढ़। सीमांत जनपद के मोस्टमानू में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के इसी सत्र से संचालन के दावों पर बजट का ग्रहण लगता दिख रहा है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और कुशल डॉक्टर तैयार करने के उद्देश्य से बन रहे इस कॉलेज का निर्माण कार्य धन के अभाव में अब तक केवल 75 प्रतिशत ही पूरा हो सका है।
768 करोड़ की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए शासन से अब तक केवल 460 करोड़ की राशि ही अवमुक्त हो पाई है। पर्याप्त बजट न मिलने से निर्माण की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। कॉलेज प्रबंधन पिछले दो महीनों से अगली किस्त का इंतजार कर रहा है जबकि अगस्त से नया बैच शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की अनुमति अनिवार्य है। बताते हैं कि एनएमसी की टीम अप्रैल में व्यवस्थाएं परखने के लिए पिथौरागढ़ पहुंचेगी। टीम के दौरे और बजट की कमी को देखते हुए प्रबंधन का पूरा ध्यान अब पहले बैच के लिए जरूरी भवन तैयार करने पर है। शेष भवनों का निर्माण अगले सत्रों तक टालने की रणनीति बनाई गई है।
मर्ज होंगे जिला और महिला अस्पताल
मानकों के अनुसार मेडिकल कॉलेज के लिए 450 बेड का अस्पताल होना अनिवार्य है। नया अस्पताल धरातल पर न उतर पाने के कारण, अब मानक पूरे करने के लिए जिला और महिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में मर्ज कर दिया गया है। अब इन दोनों अस्पतालों का संचालन कॉलेज प्रबंधन के अधीन होगा।
कोट
मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए शासन से समय-समय पर बजट मिल रहा है। इस साल हर हाल में संचालन शुरू करने के लक्ष्य के साथ प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। - डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़