शराब की दुकान के खिलाफ हाथों में लाठी लेकर पहरा देती महिलाएं
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थल कस्बे से शराब की दुकान हटाने को लेकर आंदोलित महिलाएं अब रात के समय भी पहरा दे रही हैं। महिलाओं को आशंका है कि प्रशासन और शराब ठेकेदार की मिलीभगत से किसी भी समय यहां शराब की दुकान खुल सकती है। महिलाओं ने कहा है कि सरकार को छोटे कस्बों से शराब की दुकानें खुद हटा देनी चाहिए। इससे लोगों को आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
महिलाओं ने खुद ही रात में पहरा देने का फैसला लिया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं क्षेत्र पंचायत सदस्य सुंदरी वर्मा ने कहा कि सरकार को सिर्फ शराब और खनन की चिंता है, लेकिन इन दोनों चीजों की वजह से पहाड़ की युवा पीढ़ी को कितना नुकसान हो रहा है इस पर कोई विचार नहीं किया। उन्होंने कहा कि शराब से कई घर बर्बाद हो गए हैं, जबकि तस्करी करने वाले मालामाल होते जा रहे हैं। महिलाओं के आंदोलन के कारण अब तक हाइवे से हटाई गई शराब की दुकान दूसरी जगह नहीं खुल पाई है।
महिलाएं रात होते ही हाथों में लाठियां लेकर बाजार में पहुंच रही हैं और जगह-जगह गश्त देकर यह आभास करा रही हैं कि शराब के खिलाफ आंदोलन थमा नहीं है। इस दौरान पार्वती देवी, रुक्मिणी देवी, सीता देवी, रेखा टम्टा, नीमा देवी, वंदना वर्मा, राखी वर्मा, कमला देवी, चंपा देवी, आनंदी देवी, हीरा देवी, जयंती देवी, राखी बृजवाल, भागीरथी देवी, विमला देवी, मुन्नी देवी, पुष्पा देवी आदि शामिल थीं।