मुनस्यारी तहसील की दो वन पंचायत की महिलाओं ने अपने दम पर जंगल को संरक्षित करने का निर्णय लिया है। महिलाओं का कहना है कि जब पशुओं और उनके लिए चारा पत्ति की जिम्मेदारी उनकी है तो जंगल की देखभाल और इसका संरक्षण भी वह खुद करेंगी। गांव के पुरुषों ने भी महिलाओं की इस पहल की सराहना की है।
शुक्रवार को रसियाबगड़ और भैंसखाल वन पंचायत की नई कार्यकारिणी के चुनाव के लिए प्रधान चंद्रकला दानू की अध्यक्षता में बैठक हुई। वन वीट अधिकारी रमेश लोधियाल और राजस्व निरीक्षक एमएम पंत की देखरेख में हुए चुनाव में रसियाबगड़ वन पंचायत के लिए तुलसी देवी को सरपंच और दुर्गा देवी, भागीरथी पांगती, कमला पांगती, भागीरथी बिष्ट, आनंदी कोरंगा, कलावती देवी, नीमा देवी, खीमा बिष्ट को पंच, भैंसखाल वन पंचायत के लिए द्रौपदी देवी को सरपंच और खीमा देवी, मोहनी देवी, नीरू देवी, बसंती देवी, काली देवी, गाउली देवी, ललिता जोशी, हेमा देवी को पंच चुना गया। सरपंच चुने जाने के बाद तुलसी देवी और द्रौपदी देवी ने कहा कि एकजुट होकर जंगल को बचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लैंटेना (कुरी घास) ने वन पंचायत की 15 हेक्टेयर भूमि को खराब कर दिया है। इसके उन्मूलन के प्रयास होंगे। राजस्व निरीक्षक एमएम पंत ने कहा कि दोनों वन पंचायतों को महिला वन पंचायतों के नाम से जाना जाएगा।
निवर्तमान वन सरपंच जीवन सिंह और रमेश सिंह ने महिलाओं की इस पहल की सराहना की है। ज्येष्ठ उप प्रमुख जशोदा देवी, प्रधान चंद्रकला दानू, उप प्रधान अनीता बिष्ट, कलावती जोशी ने नवनिर्वाचित सरपंचों का माल्यार्पण किया। इस दौरान सूबेदार कल्याण सिंह, ग्राम प्रहरी मनोज बिष्ट, दरपान सिंह, हीरा सिंह, गोवर्धन जोशी, चंद्र राम, धन राम, हीरा राम आदि मौजूद थे।