बीमार महिला को कुर्सी में बांधकर लाते ग्रामीण
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मदकोट-बोना रोड बंद होने से क्षेत्र के लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। इस क्षेत्र के सबसे दूरस्थ तोमिक गांव से शनिवार को लोग एक बीमार महिला को 25 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर 15 घंटे में मदकोट लेकर आए। गांव के लोगों ने बताया कि उनके गांव में डोली नहीं थी, इसलिए बीमार महिला को कुर्सी में बांधकर लाना पड़ा।
तोमिक गांव के तेज सिंह की पत्नी कमला देवी (50) की तबियत शुक्रवार रात अचानक खराब हो गई। उनके पांवों में दर्द होने लगा और वह उठ-बैठ नहीं पा रही थी। उनकी गंभीर हालत को देख गांव के लोगों ने अस्पताल ले जाने की तैयारी की। शनिवार तड़के चार बजे तोमिक से इस बीमार महिला को कुर्सी में बांधकर पूरे 15 घंटे बाद शाम सात बजे मदकोट पहुंचे। गांव के लोगों ने बताया कि यदि मदकोट-बोना रोड पर यातायात सुचारु होता तो उनको अधिक से अधिक चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता। महिला को पैदल लेकर आने वाले कई लोग थकान से खुद ही बीमार होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। महिला का यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज शुरू हो गया है।
तोमिक गांव के खुशाल सिंह ने कहा कि इतने कष्टों को देखकर तो यही लगता है जैसे हम आजाद भारत में रहते ही नहीं हैं। सबसे दुर्भाग्य की स्थिति यह है कि यह इलाका मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आता है। मदकोट-बोना रोड दो महीने से बंद है। ग्राम प्रधान तुलसी देवी ने कहा कि सड़क खोलने के लिए कई बार अधिकारियों को पत्र दे दिया है, लेकिन कोई नहीं सुनता। उन्होंने कहा कि अब अपनी व्यथा किसे सुनाएं। बता दें कि पिछले हफ्ते इसी इलाके के निरतोली गांव की एक बीमार महिला को भी इसी तरह लोग कठिन रास्ते से मदकोट अस्पताल लाए थे।