पिथौरागढ़ जिले के झूलाघाट में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाएं गर्भवतियों पर भारी पड़ रही हैं। अस्पतालों में प्रसव कराने की सुविधा न होने या इससे स्वास्थ्य कर्मियों के हाथ खड़े करने से गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है और 108 एंबुलेंस कर्मी इनका सुरक्षित प्रसव करा रहे हैं। झूलाघाट पीएचसी से एक गर्भवती को प्रसव के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया। जिला मुख्यालय पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस कर्मियों ने सुरक्षित प्रसव कराकर विशेषज्ञ स्वास्थ्य कर्मियों को आईना दिखाया।
गेठीगाड़ा निवासी सुरेंद्र सिंह की पत्नी कौशल्या देवी को प्रसव पीड़ा से जूझते हुए पीएचसी झूलाघाट पहुंचाया गया। स्टाफ की कमी बताकर यहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने उसका प्रसव कराने से हाथ पीछे खींचकर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन उसे 108 एंबुलेंस से लेकर जिला मुख्यालय रवाना हुए। बिण में सेना के अस्पताल के पास पहुंचते ही उसकी तबियत बिगड़ गई। ऐसे में एंबुलेंस कर्मियों ने जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए गर्भवती का प्रसव कराने की जिम्मेदारी उठाई।
ईएमटी शिव सागर और चालक दीपक चंद्र ने गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराकर जच्चा-बच्चा की जान बचाते हुए स्वास्थ्य विभाग को आईना दिखाया। दोनों को महिला अस्पताल में भर्ती किया गया। स्वास्थ्य कर्मियों के मुताबिक दोनों स्वस्थ हैं।
पीएचसी झूलाघाट में नेपाल से भी आते हैं मरीज
पीएचसी झूलाघाट में आए दिन भारत के साथ ही नेपाल की गर्भवतियां प्रसव के लिए पहुंचती हैं। अधिकतर गर्भवतियों को स्टाफ की कमी का हवाला देकर हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है इससे उनकी जान आफत में फंस रही है। अस्पताल में प्रसव न होने पर स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को सीमांत क्षेत्र के अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती करनी चाहिए।