पाली गांव में चारों तरफ शोक छाया है, लेकिन देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद नायक चंद्र सिंह को गांव के लोग पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई देना चाहते हैं। रविवार को दोपहर बाद तीन बजे जब कुमाऊं स्काउट् के कमांडेंट कर्नल ललित मिश्रा अपनी टीम के साथ पाली गांव में पहुंचे तो लोगों को इस शहादत पर पूरा यकीन भी हो गया। तब तक शहीद की बूढ़ी मां कौशल्या देवी और पत्नी चंद्रकला को शहादत की जानकारी ही नहीं दी गई थी। कर्नल मिश्रा ने बड़े धैर्य के साथ एक-एक कर शहीद की पत्नी, मां, बच्चों और भाइयों को सारी स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि नायक चंद्र सिंह का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। सेना शहीद के परिवार की पूरी मदद करेगी। शहीद की मां बदहवास हालत में हैं। जबकि पत्नी को बेहोशी के दौरे पड़ रहे हैं।
नायक चंद्र सिंह छह माह पहले तक कुमाऊं स्काउट्स में ही तैनात थे। उसके बाद उनका चयन 13 राष्ट्रीय रायफल्स में हो गया। जब वह राष्ट्रीय रायफल्स ज्वाइन करने के लिए जम्मू कश्मीर को निकले तो मई में एक दिन के लिए अपनी माता से मिलने भी आए थे। उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के नायदखाई इलाके में हुई। बताते हैं कि इस इलाके में आतंकवादी बहुत ज्यादा सक्रिय रहते हैं। सेना के अधिकारियों ने जानकारी दी कि नायक चंद्र सिंह के नेतृत्व में सेना के 15 जवानों की टुकड़ी नायदखाई गांव में गश्त पर थी तभी आतंकियों ने पीछे से गोली चला दी। नायक चंद्र सिंह को दो गोली लगी और वह शहीद हो गए।
37 वर्षीय चंद्र सिंह जून 1995 में सेना में भर्ती हुए थे। कुछ समय सेना में नौकरी के बाद उन्होंने अपने पत्नी चंद्रकला, बेटी नेहा और निशा को कुछ दिन तक पढ़ाई के लिए पिथौरागढ़ रखा और डेढ़ वर्ष पूर्व बच्चों को हल्द्वानी के ऊंचापुल में किराए का मकान लेकर रख दिया। पत्नी और बच्चे इस समय हल्द्वानी में ही थे। ये लोग शनिवार को ही पाली गांव पहुंचे हैं। वह जब भी छुट्टी मिलती तो बच्चों के पास हल्द्वानी चले जाते। घर पर मां कौशल्या देवी छोटे भाई साधो सिंह के साथ रहती हैं। साधो सिंह जीआईसी अस्कोट में शिक्षक हैं। बड़ा भाई भगत सिंह यूपी जलकल विभाग में बुलंदशहर में तैनात हैं। उनकी नौकरी मृतक आश्रित कोटे से लगी। पिता हर सिंह की नौकरी के दौरान 1995 में मृत्यु हो गई थी। कुमाऊं स्काउट्स के कर्नल ललित मिश्रा के साथ कै. आदित्य तरार, सुबेदार दरबान सिंह समेत 15 जवानों की टुकड़ी शनिवार की रात ही थल पहुंच गई थी।
आतंकियों का खात्मा करने को सख्त कदम उठाएं
थल। पाली गांव में 55 परिवार रहते हैं। सभी लोगों ने चंद्र सिंह के अच्छे व्यवहार को याद किया। गांव के कै. धन सिंह रावत, भगत सिंह बृजवाल, लाल सिंह आदि ने कहा कि इस शहादत से सभी दुखी हैं लेकिन चंद्र सिंह की वीरता पर फख्र करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि आतंकियों का खात्मा करने के लिए सख्त कदम उठाए। वरना ऐसी वारदातें होती रहेंगी।
आज सैनिक सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
शहीद चंद्र सिंह को सोमवार सुबह थल के रामगंगा घाट में अंतिम विदाई दी जाएगी। पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंत्येष्टि होगी। आज पार्थिव शरीर के पहुंचने में देरी होने से गांव नहीं ले जाया गया। पार्थिव शरीर थल के निकट गोचर में रखा गया है। कल सुबह सबसे पहले पार्थिव को अंतिम दर्शनों के लिए गांव ले जाया जाएगा। वहां से फिर अंतिम संस्कार के लिए थल घाट में लाया जाएगा। गांव के लोगों और सेना के अधिकारियों ने यही तय किया है।
अजय टम्टा और दुर्गापाल ने चढ़ाया पुष्पचक्र
शहीद चंद्र सिंह का पार्थिव शरीर सेना के हेलीकाप्टर से रविवार को अपराह्न 1.20 बजे सेना के हेलीपैड में पहुंचा। पार्थिव को बरेली से लाया गया था। सुबह बरेली में घना कोहरा छाने से हेलीकाप्टर उड़ान नहीं भर सका। सेना के हेलीपैड में शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और सेना के अधिकारी मौजूद थे। केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने शहीद के पार्थिव पर पुष्पचक्र चढ़ाया। ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर राकेश मनोचा, विधायक मयूख महर, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी, डीएम डा. रंजीत सिन्हा, एसपी अजय जोशी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, मनोज ओझा, सेना के डिप्टी कमांडेंट शिव राणा, सीडीओ आशीष चौहान, सीओ हिमांशु साह, एडीएम मोहम्मद नासिर समेत अन्य अधिकारी भी शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शहीद के पार्थिव को यहां से सेना के वाहन से सड़क मार्ग से उनके गांव को ले जाया गया।