पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने कहा कि पहाड़ को बर्बाद करने में शराब और खनन का बड़ा हाथ रहा है। शराब लोगों को तो खनन हरे-भरे पहाड़ों को खोखला कर रहा है। वह कहते हैं कि पहाड़ के गांवों के खाली होने के पीछे राजनैतिक दलों की साजिश भी प्रतीत होती है। राजनेता नहीं चाहते कि गांव आबाद हों और गांवों में समृद्धि लौटे।
बृहस्पतिवार को ‘गांव बचाओ’ यात्रा के साथ यहां पहुंचे डा. जोशी ने कहा कि पहाड़ के गांवों के खाली होने की पीड़ा सभी को महसूस करनी चाहिए। उन्होंने नौजवानों का आह्वान किया कि वह इस विषय में सोचे और पिछली पीढ़ी की गलती को सुधारने का काम करें। इससे पहले रामलीला मैदान से गांव बचाओ रैली निकली। रैली कलक्ट्रेट के पास स्थित रामलीला मैदान तक गई। वहां हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कारणों से ही पहाड़ के गांवों से पलायन हुआ है। राज्य गठन के बाद भी जिन हालातों के बदलने की उम्मीद की जा रही थी वह सभी धूमिल हो गई हैं। जाखपंत के देवेंद्र पंत ने अपने गांव में हो रहे अवैध खनन का मुद्दा उठाया। बड़ावे के विपिन जोशी ने कहा कि उनके गांव में 2010 में 4000 वोटर थे, जो अब 1400 रह गए हैं। मुन्ना सिंह राणा ने यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि 25 सितंबर से चल रही इस यात्रा के दौरान हर जगह लोगों ने पीड़ा व्यक्त की है और निश्चित रूप से इसके समाधान के रास्ते निकलेंगे। जगदीश कलौनी, यात्रा के स्थानीय संयोजक योगेश पाठक ने भी विचार रखे।