मदकोट घाटी में पैराग्लाइडिंग उड़ाते ब्रिटिश पायलट
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ब्रिटेन के पैराग्लाइडिंग पायलट जॉन विलियम एवं एडवर्ड ने मुनस्यारी के चुलकोट धार से उड़ान भरी और भदेली, नंदादेवी मंदिर के पास ग्लाइडर को उतारा। दोनों पायलटों ने कहा कि चुलकोट धार को पैराग्लाइडिंग के क्षेत्र में विकसित किया जाए तो यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। बुधवार को दोनों विदेशी पायलटों के साथ उत्तराखंड पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के सचिव शंकर सिंह ने भी उड़ान भरी। शंकर सिंह ने पिछले वर्ष भी खलियाटॉप से मुनस्यारी तक पैराग्लाइडिंग की थी। वह इस क्षेत्र में लगातार पैराग्लाइडिंग की संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं।
विलियम और एडवर्ड ने बुधवार को तीन घंटे तक हवा में करतब दिखाए। वह पैराग्लाइडर को करीब 1500 मीटर की ऊंचाई तक ले गए और 20 किलोमीटर की दूरी तक उड़ान भरते रहे। उन्होंने गोरीपार के सभी गांवों के चक्कर काटे। पंचाचूली पर्वतमाला के करीब जाने की कोशिश की। बाद में उन्होंने मदकोट से आगे बढ़ते हुए भदेली में ग्लाइडर को उतारा। मदकोट और पंचाचूली के करीब पहली बार पैराग्लाइडिंग हुई है। गोरीपार में बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर पैराग्लाइडिंग का लुत्फ उठाया।
एडवर्ड का कहना है कि चुलकोट धार से मदकोट और भदेली तक पर्यटकों के लिए सबसे अच्छा ग्लाइडिंग स्थल है। इस स्थान पर भविष्य में पर्यटक आराम से टेंडम ग्लाइडर से ग्लाइडिंग कर सकते हैं। टेंडम ग्लाइडर में पायलट के साथ एक पर्यटक को भी बैठाया जाता है। शंकर सिंह ने चुलकोट धार से भदेली तक उड़ान भरी। वह कहते हैं कि आने वाले समय में मुनस्यारी को पैराग्लाइडिंग स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।