कांफ्रेंस के समापन पर अतिथियों का स्वागत करते निदेशक
- फोटो : अमर उजाला
सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित रिसेंट एडवांसेज इन साइंस एंड टेक्नालाजी विषय की कांफ्रेंस का मंगलवार को समापन हुआ। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राध्यापक डा. सीएस नेगी ने कहा कि यदि एक ही जगह से यारसागंबू का दोहन होता रहा तो आने वाले पांच साल में यह जड़ी नष्ट हो जाएगी। यारसागंबू के दोहन के लिए जिस अवैज्ञानिक तरीके का इस्तेमाल हो रहा है वह बेहद गलत है। मुख्य अतिथि डीआरडीओ के पूर्व निदेशक प्रो. एस वत्सल ने कंप्यूटर एडेड टोमोग्राफी, टोमोग्राफी स्केलर, बायोमेडिकल इमेजिंग, सीटी इमेजिंग की जानकारी दी।
पीजी कॉलेज के प्राध्यापक डा. आरए सिंह ने भूस्खलन, भूकटाव के कारणों पर विस्तार से जानकारी दी। कहा कि जमीन के साथ की जाने वाली छेड़छाड़ से ही यह समस्या पैदा हो रही है। उन स्थानों पर ही ज्यादा भूकटाव हो रहे हैं, जहां पर निर्माण कार्य चले हों। समापन सत्र में हिमालयन रीजन के समग्र विकास, मेडिसिनल प्लांट, पिथौरागढ़ की मिट्टी का विश्लेषण के बारे में वैज्ञानिकों ने शोधपत्र पेश किए।
डा. डीके तिवारी, डा. ऋचा तिवारी, सुमित जोशी ने अपने शोधपत्रों में विज्ञान से संबंधित कई जानकारियां दीं। सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डा. बीके सिंह ने सभी वैज्ञानिकों का आभार जताया। संचालन ज्योति जोशी और तरू महरा ने किया। संयोजक जयदीप किशोर, सचिव डा. बीपी सिंह, देवनिधि बिष्ट, पुष्पेंद्र खड़ायत, डा. गिरीश पंत, डा. मनीषा बिष्ट, सविता पाटनी आदि ने कांफ्रेंस के संचालन में सहयोग दिया।