पद्मभूषण से सम्मानित 78 वर्षीय डा. केएस वल्दिया ने 1980 में ‘जियोलॉजी आफ कुमाऊं लेसर हिमालया’ पुस्तक में हिमालय क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों और नीति निर्धारकों को एक दिशा देने की कोशिश की थी। वह चाहते थे कि कुमाऊं में अनियोजित विकास पर रोक लगे।
निर्माण के समय अवैध खनन और भारी मशीनों का प्रयोग न हो। 1998 में उन्होंने ‘डायनामिक हिमालया’ पुस्तक लिखी। उन्होंने क्रोनाइस और क्रुबाइंन की लिखी ‘डाउन टू अर्थ’ पुस्तक का अनुवाद भूविज्ञान का परिचय नाम से किया। 1987 में लिखी उनकी पुस्तक ‘आस्पेक्ट्स आफ टैक्टानिक्स’ बेहद चर्चित रही।
डा. वल्दिया ने हाईस्कूल तक की शिक्षा देव सिंह राजकीय इंटर कालेज से हासिल की थी। विद्यालय के प्रधानाचार्य डा. अशोक पंत का डा. वल्दिया से बेहद करीबी रिश्ता है।
डा. पंत ने बताया कि डा. वल्दिया पर्यावरणविद् भी हैं। 2005 में उन्होंने ‘एनवायरमेंटल जियोलॉजी’ और ‘जियोलॉजी एनवायरमेंट आफ सोसायटी’ नाम से पुस्तक लिखी। 2010 में उन्होंने ‘द मेकिंग आफ इंडिया जियोडायनेमिक इवोल्यूशन’ पुस्तक लिखी। 2012 में भूवैज्ञानिक चमत्कार पर आधारित उनकी पुस्तक ‘सरस्वती द रिवर दैट डिसएपीयर्ड’ चर्चा में आई। इसमें विलुप्त होती सरस्वती नदी पर अध्ययन किया गया है।