आपदा प्रभावित बस्तड़ी गांव के लोग पहाड़ से अन्यत्र जाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि वन पंचायत एवं उससे लगी जमीन का भूगर्भीय सर्वेक्षण किया जाए और वहां पर पीड़ितों के लिए मकान बनाए जाएं। वन पंचायत और उसके पास करीब 20 नाली पक्की जमीन है। डीएम एचसी सेमवाल ने पिछले दिनों बस्तड़ी का दौरा कर लोगों से कहा था कि वह खुद भी अपने स्तर से जमीन की तलाश करें, यदि लोग जमीन का चयन कर लेंगे तो प्रशासन उस स्थान पर बसाने की तैयारी कर देगा।
बस्तड़ी में कई मकान मलबे में दब गए और जो मकान बचे हैं उनके आसपास मलबे के ढेर जमा हो गए हैं। ऐसे में अब गांव रहने लायक नहीं है। बस्तड़ी में खेत इस तरह दबे हैं कि उनमें वर्षों तक खेतीबाड़ी संभव नहीं है। गांव के लोग खुद भी अपनी स्थायी व्यवस्था का प्रयास कर रहे हैं। लोगों का मालूम है कि राहत शिविरों में ज्यादा समय नहीं रह सकते। सिंघाली बाजार में किराए के कमरे मिलना संभव नहीं है। इस इलाके से अन्यत्र जाने की इच्छा लोगों में नहीं है। लोगों का कहना है कि गांव के ऊपरी हिस्से में स्थित वन पंचायत और उससे सटी जमीन पर मकान बना दिए जाएं तो वह पहाड़ पर ही रह सकेंगे। गांव के गोविंद भट्ट, हरीश भट्ट, रमा भट्ट, बलपा भट्ट ने कहा कि प्रशासन को जितनी जल्दी हो सके जगह फाइनल कर देनी चाहिए।
बता दें कि बस्तड़ी का कोई भी परिवार अब उजड़े गांव में जाने को तैयार नहीं है। लोगों की मन की स्थिति ऐसी है कि वह पहाड़ छोड़कर मैदान में बसने को भी तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि उनकी रिश्तेदारी, जान पहचान के लोग पहाड़ पर ही ज्यादा हैं। जिलाधिकारी का कहना है कि यदि गांव के लोग सर्वसम्मति से किसी जगह का चयन करते हैं तो वहां पर भवनों का निर्माण कराया जाएगा। प्रशासन ने बस्तड़ी के लोगों के पुनर्वास को प्राथमिकता में रखा है।