विश्व बैंक की धनराशि से ग्रामीण क्षेत्र के लिए बन रही सैंणराथी सड़क पर धांधली की हदें पार कर दी हैं। सड़क के जिन स्थानों पर स्कबर की जरूरत थी, वहां पर स्कबर नहीं बने हैं, जिसका परिणाम बरसात में दिखने लगेगा। वहीं, कई स्थानों पर नाममात्र के ढांचागत स्कबर बनाए गए हैं। ग्रामीणों ने जरूरतमंद स्थानों पर स्कबर बनाने की मांग की है, अन्यथा संबंधित ठेकेदार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
फूलीबैंड के पास से बनी छह किमी लंबी सैंणराथी सड़क पर इन दिनों स्कबर निर्माण कार्य चल रहा है। स्कबर बनाने का कार्य द्वारिका निर्माण एजेंसी नोएडा करा रही है। ठेकेदार के स्कबर निर्माण से लोग परेशान हैं। ठेकेदार जिन स्थानों पर पत्थर उपलब्ध हो रहे हैं, केवल उन्हीं स्थानों पर स्कबर निर्माण करा रहा है, जिनका कोई औचित्य नहीं है। पूरी सड़क पर बने 35 स्कबरों में से कुछ ही स्कबर सही स्थान पर बनाए गए हैं, अन्य स्कबर जंगलों में बनाए गए हैं। लोगों ने गांव में स्कबर बनाने की मांग की, लेकिन ठेकेदार की मनमानी के आगे लोगों का मांग पूरी नहीं हो पाई।
सैणराथी में अड़खेत के पास ऐसे स्थान पर स्कबर निर्माण किया गया है, जहां कभी बरसात का पानी नहीं रुकता है। निर्मित स्कबर से कुछ ही दूरी पर रौली बहती है, बावजूद स्कबर बना दिया गया है। निर्मित स्कबर को केवल सड़क के आगे की ओर से स्कबर का आकार दिया गया है, लेकिन अंदर खुदान नहीं किया गया है। ग्राम प्रधान पुष्पा देवी, मोहन राम, गंगा सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह का कहना है कि गांव में खेतों और मकानों के सुरक्षा की दृष्टि से 12 स्कबरों की आवश्यकता है, लेकिन मात्र 4 स्कबर बनाए गए हैं।
ठेकेदार से जंगल के बजाय गांव में स्कबर बनाने को कहने पर उन्हें केवल अब तक धमकी मिली है। इन लोगों ने कहा कि गांव में स्कबर नहीं बनाए गए और नाममात्र ढांचागत स्कबरों को पुन: नहीं बनाया गया तो वह आंदोलन शुरू कर देंगे। उधर, अवर अभियंता शोयब अली ने निर्मित स्कबरों में गड़बड़ी का मामला स्वीकार करते हुए कहा कि स्कबरों की क्वालिटी बेहद खराब हुई है। उनमें सुधार किया जाएगा और गांव में आवश्यकता के अनुसार स्कबर बनाए जाएंगे।