पिथौरागढ़। सीमांत जिले की लोक संस्कृति और परंपराओं के वाहक सातूं-आठूं पर्व की धूम शुरू हुई है। नगर से लेकर कस्बों तक सातूं पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। महिलाओं ने मांगलिक गीतों के साथ गौरा माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजन के लिए बिरुड़ धोए। श्री रामलीला प्रबंधकारिणी समिति की ओर से रामलीला मैदान सदर में आठूं महोत्सव का आगाज हुआ। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेषभूषा में मां गौरा की स्तुति में कां रे उपजी लाली गमरा, का भयो उज्यालो गीत का गायन किया।
सातूं पर्व पर नगर की महिलाओं ने पितरौटा में मां गौरा का विग्रह यानि प्रतिमा तैयार की। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक परिधानाें में सजधज कर मां गौरा की झांकी निकाली। झांकी ढोल-दमाऊं, छोलिया नृत्य के साथ टकाना रोड, केमू बस स्टेशन, पुरानी बाजार, सिमलगैर होते हुए रामलीला मैदान पहुंची। यहां पंडित नीरज जोशी ने विधि विधान से पूजा-अर्चना कर मां गौरा की प्रतिमा स्थापित की। बड़ी संख्या में लोगों ने रामलीला मैदान पहुंचकर मां गौरा का आशीर्वाद लिया। मां गौरा की प्रतिमा के साथ स्कूली बच्चों ने भी मनमोहक झांकियां निकाली। इसके बाद महिलाओं ने कां रे उपजी लाली गमरा कां भयो उज्यालो, खोल दे माता खोल भवानी, गौरा मैया जै हो तुम्हारी लोकगीतों के साथ खेल लगाए। मैदान में झोड़ा-चांचरी की भी धूम रही। संचालन दीवान सिंह वल्दिया, जनार्दन उप्रेती ने किया। वहां रामलीला कमेटी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह माहरा, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, विधायक मयूख महर, महापौर कल्पना देवलाल, रेखा जोशी आदि मौजूद रहीं। वहीं कनालीछीना, सतगढ़, पलेटा, दौला सहित अन्य क्षेत्रों में सातूं पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। बृहस्पतिवार को आठूं पर्व पर महेश्वर यानि भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
मां गौरा के पूजन के लिए धोए बिरुड़
मां गौरा के पूजन के लिए महिलाओं ने बिरुड़ धोए। बिरुड़ धोने के लिए पारंपरिक नौले-धारों में महिलाओं की भीड़ जुटी रही। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने गौरा के विग्रह को स्थापित किया। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने डोर धागा धारण कर सुख-समृद्धि का आशीष मांगा। वहीं देवल, हिनकोट, रसगाड़ी, बेड़ा, ऊंचाकोट, बगड़ीहाट, तीतरी, सांवली सेरा आदि स्थानों में भी पर्व की धूम मची है। सं