शहर के मुख्य बाजार में लोगों ने इस कदर सामान फैलाया हुआ है कि पैदल चलने वालों तक के लिए जगह नहीं बची है। जिसका जहां मन आया वहीं सामान फैलाकर दुकान लगा ली और शाम को समेट ली। हालांकि, नगरपालिका और पुलिस बीच-बीच में अभियान चलाकर मुख्य रास्ते पर सामान फैलाकर बैठे रहने वालों का चालान काटती रहती है, लेकिन अभियानों का असर अधिक से अधिक दो-तीन दिन तक ही रह पाता है। गांधी चौक, नया बाजार, पुराना बाजार, धर्मशाला लाइन में रास्ते को घेरकर सामान लगाने की प्रथा बंद नहीं हो पाई है।
नगर की सभी आंतरिक सड़कों और रास्तों की देखरेख नगरपालिका करती है। इन सड़कों और रास्तों में होने वाले अतिक्रमण को हटाने के लिए अब तक ठोस अभियान नहीं चल पाया है, यदि कभी अभियान चला भी तो व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों के दबाव में फिर वह ठंडा हो जाता है। पहले भी कई बार यह मसले प्रशासन की बैठकों में उठ चुके हैं। आम जनता को पैदल चलने में होने वाली परेशानी पर चर्चाएं भी हुई हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठने से समाधान नहीं निकल पाता। नतीजतन नगर की हर आंतरिक सड़क और रास्ता अतिक्रमण की चपेट में है, इनमें सुबह सामान लगा दिया जाता है और शाम को बाजार बंद होते समय ही सामान हटता है। यह समस्या लगातार बढ़ रही है। देखादेखी दूसरे व्यापारी भी इसी तरह के रवैए को अपनाते जा रहे हैं।
नगरपालिका फिर चलाएगी अभियान
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी का कहना है कि नगर के रास्तों और सड़कों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ फिर से अभियान चलाया जाएगा। पिछले महीने 40 लोगों के चालान काटे थे। गांधी चौक की व्यवस्था को सुधारा गया था। अब नए सिरे से चिन्हीकरण होगा। हर रोड और रास्ते में चिन्हीकरण कर सफेद पट्टी लगाई जाएगी। इस बार पालिका ज्यादा जुर्माना लगाने की तैयारी में है।