अब यह सवाल उठने लगा है कि बैंकों के आगे दस नवंबर से शुरू हुई लाइन का अंत कब होगा, जबकि केंद्र सरकार, वित्त मंत्री, रिजर्व बैंक के गवर्नर ने नोटबंदी के दिन ही लोगों को आश्वस्त किया था कि बस दस दिन में हालात सामान्य हो जाएंगे। बैंकों से पर्याप्त कैश नहीं मिलने के कारण पिथौरागढ़ में सबसे ज्यादा परेशानी में सैनिकों की पत्नियां आ गई हैं।
सैनिकों ने अपने परिवारों और बच्चों को नगर में किराए का कमरा लेकर रखा हुआ है। कई सैनिकों के यहां पर मकान भी हैं। उनका पैसा बैंकों के खातों में आता है। हर महीने इसमें से निकासी कर सैनिकों की पत्नियां महीने भर का खर्च चलाती थी, लेकिन इस बार वह भारी परेशानी में आ गई हैं। खातों में पैसा महीने के अंत में पड़ गया था, लेकिन बैंक से भुगतान पर्याप्त नहीं मिल पा रहा है। कैश की कमी के चलते सभी बैंक दो, चार, छह या अधिकतम दस हजार रुपए तक का ही भुगतान कर पा रहे हैं।
शुक्रवार को स्टेट बैंक में लगी लाइन में ज्यादातर फौजियों की ही पत्नियां थीं। हर महिला पैसे को लेकर परेशान दिखी। उनका कहना था कि जब खाते में अपना पैसा है तो बैंक को भुगतान करने में दिक्कत क्या है। अब नया महीना शुरू हो गया है। बच्चों की फीस, मकान का किराया, बिजली का बिल, रसोईगैस का सिलेंडर, दूध का खर्चा, राशन, सब्जी का खर्चा आदि मिलाकर हर परिवार को कम से कम 20 हजार रुपए की जरूरत है, लेकिन बैंक इतनी रकम देने में हाथ खड़े कर रहा है। अधिकांश एटीएम में पैसा नहीं है। जिनमें पैसा निकल रहा है तो 2500 रुपए से अधिक रकम हाथ में नहीं आ रही है। वहीं, शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में पेंशनर बैंकों में पहुंचे। विवाह वालों ने तो अब आवेदन करना ही छोड़ दिया है।
फिर होने लगी कैश की कमी
जिले के सभी बैंकों में फिर से कैश की कमी होने लगी है। स्टेट बैंक में यदि शनिवार तक आसपास के जिलों से कैश का इंतजाम नहीं होता है तो इस बैंक से भी भुगतान की समस्या आने लगेगी। स्टेट बैंक का एटीएम तीन दिन से बंद पड़ा है। उसमें डालने के लिए बैंक के पास रुपए नहीं हैं। जब जिले के मुख्य बैंक की ही यह हालत है तो अन्य की स्थिति के बारे में सोचा जा सकता है। स्टेट बैंक के डिप्टी मैनेजर मुन्ना गिरी गोस्वामी ने बताया कि नजदीकी जिलों से कैश की व्यवस्था की जा रही है।
पिथौरागढ़ के लोग कब देखेंगे 500 का नया नोट
पांच सौ का नया नोट यहां कब पहुंचेगा, इसे बताने की स्थिति में बैंक के अधिकारी नहीं है। अब तक रिजर्व बैंक से यहां सीधे कैश नहीं भेजा गया है। काम चलाने के लिए आसपास के जिलों से ही रकम मंगाई जा रही है। अब तक यहां पांच सौ का नया नोट नहीं पहुंचा है। बैंकों से मिल रहा दो हजार का नोट लोगों के लिए जी का जंजाल हो गया है। इस नोट को छोटे दुकानदार लेने से मना कर रहे हैं।
बैंकों को सिक्के जमा करने के निर्देश
लीड बैंक अधिकारी एलएस मपवाल ने सभी बैंक प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि वह बैंकों में सिक्कों को जमा कराएं। यदि कोई व्यापारी सिक्कों को जमा कराने आता है तो उसे वापस न लौटाया जाए। ठीक इसी तरह बैंकों से भुगतान के तौर पर जरूरत पड़ने पर सिक्के देने के लिए कहा गया। व्यापार संघ अध्यक्ष शमशेर महर के नेतृत्व में व्यापारियों ने लीड बैंक अधिकारी से मुलाकात की और उनको जानकारी दी कि बैंकों से भुगतान के तौर पर सिक्के तो दिए जा रहे हैं लेकिन बैंक इन सिक्कों को जमा नहीं कर रहे हैं। लीड बैंक अधिकारी ने कहा कि प्रचलित मुद्रा को भुगतान और जमा किया जाएगा। उन्होंने व्यापार संघ अध्यक्ष को दिए पत्र में यह भी कहा है कि यदि कोई बैंक सिक्के लेने से मना करे तो तत्काल सूचना दें।