नाचनी (पिथौरागढ़)। मलबा आने से चार दिनों से बंद सड़क के खुलने का इंतजार खत्म नहीं हुआ तो नामिक के ग्रामीणों को खुद फावड़ा और बेलचा उठाना पड़ा। ग्रामीणों ने बंद सड़क से खुद मलबा हटाकर इसे पैदल चलने लायक बनाया। तब जाकर राशन सहित अन्य दैनिक जरूरत का सामान घर पहुंचा।
प्रसिद्ध होकरा मंदिर के साथ ही दूरस्थ गांव नामिक को जोड़ने वाली होकरा-नामिक सड़क पर चार दिन पूर्व भारी भूस्खलन हुआ। पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा आया तो सड़क पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। ग्रामीणों का गांव से बाहर निकलना बंद हो गया तो घरों में राशन और अन्य सामान की किल्लत होने लगी। परेशानी बढ़ी तो ग्रामीणों ने पीएमजीएसवाई से सड़क खोलने की गुहार लगाई। हैरानी है कि सिस्टम ने ग्रामीणों की परेशानी को अनदेखा कर दिया। दिक्कत बढ़ी तो ग्रामीणों ने खुद फावड़ा-बेचला पकड़कर सड़क को पैदल चलने लायक बनाकर पूरे सिस्टम को आईना दिखा दिया। पैदल आवाजाही शुरू होने के बाद ग्रामीण राशन सहित अन्य दैनिक जरूरत के सामान को घर पहुंचा सके।
सड़क बंद होने से पर्यटक भी परेशान
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह जैमियाल ने बताया कि नामिक पहुंचने से दो किमी पहले पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गया। ऐसे में इस सड़क पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप है। उन्होंने बताया कि इन दिनों बड़ी संख्या में पर्यटक नामिक ग्लेशियर जा रहे हैं। सड़क बंद होने से पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अंतिम पड़ाव तक पहुंचने के बाद भी पर्यटक वापस लौटने के लिए मजबूर हैं। वहीं होम स्टे संचालकों के लिए भी राशन सहित अन्य सामग्री का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि जल्द सड़क नहीं खुली तो दिक्कत बढ़ेगी।