पिथौरागढ़। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जाने वाले शौचालयों के लिए दी जाने वाली अनुदान की राशि के मानक बदल दिए हैं। पहले व्यक्तिगत रूप से शौचालय बनने वाले को 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती थी, लेकिन नए नियमों में कहा गया है जब संबंधित पूरे गांव में खुले में शौच की प्रथा पूरी तरह बंद होगी तभी शौचालय बनाने वालों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान होगा। किसी गांव में यदि 25 परिवार रहते हैं और उनमें से सिर्फ दस परिवारों ने शौचालय तैयार किए हैं तो उनको तब तक प्रोत्साहन की राशि नहीं मिलेगी जब तक सभी परिवार शौचालय तैयार न कर लें।
स्वजल परियोजना के प्रबंधक दीप चंद्र पुनेठा ने बताया कि अब स्वच्छ भारत मिशन में व्यक्तिगत रूप से अनुदान नहीं दिया जाएगा। गांव के ज्यादातर लोग यदि खुले में शौच करें तो वह मिशन के मानकों के अनुरूप नहीं बैठता। उन्होंने कहा कि जिले में केंद्र सरकार की ओर से जारी की गई नई गाइडलाइन के अनुसार ही स्वच्छ भारत मिशन के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
सात करोड़ के बदले मिले मात्र एक करोड़
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने वाले लोगों का अभी छह करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। शासन ने सात करोड़ रुपये की डिमांड के विपरीत मात्र एक करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। स्वजल परियोजना की ओर से अप्रैल 2015 तक बने शौचालयों का भुगतान कर दिया गया है। परियोजना प्रबंधक दीप चंद्र पुनेठा ने बताया कि जैसे जैसे धनराशि मिलती जाएगी भुगतान होता रहेगा। भुगतान के समय केंद्र सरकार की ओर से तय किए गए मानकों को ही आधार माना जाएगा।
जिले में 23 हजार परिवारों के पास शौचालय नहीं
जिले की 690 ग्राम पंचायतों में कुल परिवारों की संख्या 104021 है। इनमें से 22888 परिवार ऐसे हैं जिनके पास शौचालय नहीं हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ऐसे परिवारों को 2019 तक शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। स्वजल परियोजना के प्रबंधक दीप चंद्र पुनेठा ने बताया कि सर्वे के बाद लोगों से शौचालय निर्माण के लिए प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं।