इस बार मई में भी खलियाटॉप (3500 मीटर) में हिमपात हुआ है। इससे सभी लोग आश्चर्य में हैं। लोगों का कहना है कि मुनस्यारी की पंचाचूली, राजरंभा आदि चोटियों पर मौसम खराब होने पर हिमपात होता रहता है। मार्च अंतिम सप्ताह तक खलियाटॉप में भी हल्का हिमपात होता था।
पौष का जाड़ा और ज्येष्ठ माह की धूप का जिक्र अक्सर होता है लेकिन पिछली एक सदी में ऐसा पहली बार हुआ होगा जब ज्येष्ठ शुरू होने में केवल तीन दिन बचे हैं और लोग पौष माह की तरह ठिठुर रहे हैं। मुनस्यारी के खलियाटॉप में मई में लोगों ने पहली बार बर्फबारी देखी।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र से सटे मुनस्यारी के खलियाटॉप में अब तक मार्च अंतिम सप्ताह तक ही हल्की बर्फबारी होती थी। इस बार मई में भी खलियाटॉप (3500 मीटर) में हिमपात हुआ है। इससे सभी लोग आश्चर्य में हैं। लोगों का कहना है कि मुनस्यारी की पंचाचूली, राजरंभा आदि चोटियों पर मौसम खराब होने पर हिमपात होता रहता है। मार्च अंतिम सप्ताह तक खलियाटॉप में भी हल्का हिमपात होता था।
ठंड पड़ने से गिने चुने पर्यटक पहुंच रहे
मुनस्यारी निवासी देवेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 50-60 वर्षों में उन्होंने मई में खलियाटॉप में हिमपात होते नहीं देखा। पिछले वर्षों तक सामान्य मौसम होने पर इस समय मुनस्यारी में जहां मौसम खुशनुमा बना रहता था और पर्यटकों की चहल-पहल रहती थी वहीं इस बार कड़ाके की ठंड पड़ने से गिने चुने पर्यटक ही यहां पर पहुंच रहे हैं।
स्थिति यह है कि ठंड से बचने के लिए लोगों को हीटर या अलाव जलाने पड़ रहे हैं। यही हालात धारचूला के व्यास और दारमा घाटियों में भी बने हुए हैं। वहां पर माइग्रेशन पर गए लोगों को इस बार बर्फबारी का सामना करना पड़ रहा है। मुनस्यारी और धारचूला के बुग्यालों में भेड़ों के साथ गए भेड़पालकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।