नाचनी के रामगंगा नदी में डायवर्जन करती पोकलेंड।
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रामगंगा के बहाव से भैंसखाल गांव को बचाने की कोशिश पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई। शनिवार को नदी डायवर्ट कराने के लिए बोल्डरों से बनाए गए बीम का 4 मीटर हिस्सा बह गया था। बहे हिस्से में बोल्डर पाटने के बाद भी पानी पूरी तरह डायवर्ट नहीं हो पाया।
रविवार शाम को उपजिलाधिकारी केएन गोस्वामी ने नदी को डायवर्ट करने के लिए बोल्डर डलवाए, लेकिन इसमें पूरी तरह कामयाबी नहीं मिली। एडीएम ने पोकलैंड मशीन लगवाकर नदी का बहाव भैंसखाल गांव से विपरीत दिशा में करवाने के लिए बड़े-बड़े बोल्डर नदी में डलवाए, इससे केवल तीन मीटर का हिस्सा ही पाटा जा सका। पानी अधिक होने से अब भी नदी का 50 प्रतिशत हिस्सा गांव की ओर बह रहा है। 50 प्रतिशत पानी ही नदी को डायवर्ट करने के लिए बनाए गए चैनल (नहर) में बह रहा है। एसडीएम ने खान अधिकारी प्रमोद कुमार को ट्रीटमेंट के लिए एक और पोकलैंड लगाने के निर्देश दिए। एसडीएम ने बताया कि जिलाधिकारी को सिंचाई विभाग के जरिए बाढ़ नियंत्रण के
कार्य कराने की संस्तुति की है।
बरसात में नदी का प्रवाह बढ़ने पर नदी का रुख भैंसखाल गांव की ओर जाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि चैनलाइजेशन का काम होने के कारण इस बार खतरा कम हो जाएगा। नदी को डायवर्ट करने का काम 28 मई से शुरू हुआ, 15 जून तक चला। लोगों का मानना है कि यह काम एक मई से शुरू होता तो कारगर रहता। भैंसखाल में 1942 से भूकटाव हो रहा है। 2000 तक लगातार कटाव हुआ। 2013 में अधिक कटाव हुआ। 2014 में हरड़िया नाले में झील बनने से भूमि को काफी नुकसान पहुंचा। अब तक भैंसखाल में करीब 400 नाली जमीन नदी की भेंट चढ़ चुकी है।