उत्तराखंड पेयजल निगम को राजकीय विभाग घोषित करने की मांग को लेकर अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बुधवार को भी अपने दफ्तरों में ताले डालकर धरना दिया। 14 दिसंबर तक तालाबंदी जारी रहेगी। 15 दिसंबर से कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। पेयजल निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि विभाग का राजकीयकरण न होने के कारण उनको सेवा के दौरान सही लाभ नहीं मिल पा रहा है और विभाग के ढांचे का विकास भी नहीं हो पा रहा है। यह मांग राज्य गठन के बाद से ही उठ रही है लेकिन सरकार ने कभी इसके समाधान का फैसला नहीं लिया। ताजा आंदोलन के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है और सरकार को फैसला लेने के लिए विवश किया जाएगा।
धरनास्थल पर संघर्ष समिति के संयोजक एलएम कर्नाटक की अध्यक्षता और सह संयोजक उमेद सिंह बिष्ट के संचालन में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रांतीय कार्यकारिणी ने इस मुद्दे पर आंदोलन की जो रूपरेखा तय की है उसके अनुसार आंदोलन चलाया जाएगा। सभा में आरएस धर्मशक्तू, आशुतोष उपाध्याय, अविनाश चंद, भैरव गिरी, राजीव सैनी, जीएस चौहान, जीसी जोशी, बीएल वर्मा, हेमंत भंडारी, मनोहर पाठक, उमेश उप्रेती, सुनीता पंत, मदन गिरी आदि ने विचार रखे। कर्मचारियों के आंदोलन के कारण जल निगम में भी कामकाज ठप हो गया है।
चंपावत। राजकीयकरण और एकीकरण की मांग को लेकर जल निगम की हड़ताल ने बुधवार को 8 दिन पूरे कर लिए। अभियंताओं और अन्य हड़ताली कर्मियों ने डिवीजन कार्यालय में तीसरे दिन तालाबंदी की। हड़ताल की वजह से 2 दिसंबर से कोई कामकाज नहीं हो सका। इस कारण जिला प्लान, राज्य योजना के काम प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही टेंडर से लेकर ठेकेदारों के भुगतान तक लटके हें।