पिथौरागढ़। नगर की पुलिस लाइन स्थित काॅलोनी में एक साल के संघर्ष के बाद घरों में पानी आया। नलों से पानी आने की खुशी में लोगों ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई। पुलिस लाइन से नीचे स्थित नई काॅलोनी में पानी की लाइन नहीं होने के कारण लोगों को हैंडपंप या दूरदराज स्थित नौले धारों से पानी जुटाना पड़ता था। महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती थी।
पानी की योजना की मांग को लेकर जनवरी 2023 से आरटीआई कार्यकर्ता लक्ष्मी दत्त जोशी ने जल संस्थान से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक पत्राचार किया। लंबे संघर्ष के बाद एक माह पूर्व मोहल्ले के लिए पानी की अलग लाइन बिछाई गई। नए साल में सभी के घरों में पानी की आपूर्ति सुचारु हो गई है। घरों में लगे नलों में पहली बार पानी आने पर लक्ष्मी दत्त जोशी, मंजू जोशी, मोहिनी बाफिला, मोहन राम, खिलानंद जोशी, हेमा बिष्ट आदि मोहल्ले वासियों ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई। संवाद
पिथौरागढ़ में फिर लड़खड़ाई पेयजल आपूर्ति
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में पानी की समस्या फिर से लड़खड़ा गई है। आंवलाघाट पेयजल पंपिंग योजना से पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलने से कई जगहों पर पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई। इसके चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जिला मुख्यालय में पानी की आपूर्ति के लिए 80 करोड़ की लागत से आंवलाघाट पंपिंग पेयजल योजना बनाई गई। वर्तमान में इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी की आपूर्ति की जा रही है। तीन दिन पूर्व विद्युत लाइन पर पेड़ गिरने से तार टूटने के कारण पंपिंग नहीं हो पाई। सोमवार को पानी की आपूर्ति में सुधार हुआ लेकिन मंगलवार को फिर कई मोहल्लों में पानी नहीं आया।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र जोशी ने बताया कि मोस्टमानू स्थित टैंक में सामान्य दिनों में 4.50 मीटर पानी मिलता है लेकिन दो दिन से 3.40 मीटर पानी ही मिल पा रहा है। इसके चलते बजेटी, पीडब्ल्यूडी और नगरपालिका जोन के करीब पांच हजार से अधिक उपभोक्ता प्रभावित रहे।
पेयजल आपूर्ति सुचारू करने की मांग
पिथौरागढ़। नगर के लिंठ्यूड़ा वार्ड निवासी बिजेंद्र लुंठी ने जल संस्थान के ईई को ज्ञापन देकर पेयजल आपूर्ति सुचारु करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनके आवास में पिछले पांच दिनों से पानी नहीं आया है। नलों में पानी नहीं आने के कारण हवा भर गई है। उन्होंने कहा कि जल संस्थान दो दिन में एक घंटा पानी खोल रहा है। उन्होंने दो दिन में एक घंटा पानी खोलने की बजाए रोज आधा घंटा पानी खोलने की मांग की है। संवाद