जिला पुस्तकालय की दीवार में आईं दरारें। संवाद
पिथौरागढ़। जिला पुस्तकालय के जर्जर भवन के सुधारीकरण के लिए बैठकों में तो चर्चा हो रही है लेकिन इसके लिए धन का अब भी इंतजार है। जर्जर पुस्तकालय में हर रोज सैकड़ों विद्यार्थी बदहाल व्यवस्थाओं के बीच पढ़ने के लिए पहुंच रहे हैं लेकिन इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जिला पुस्तकालय का भवन जर्जर हो गया है। छत पर लगी बल्लियां सड़क गईं हैं और इनके गिरने का खतरा बना हुआ है। दीवारों पर पड़ी दरारें भी किसी घटना का इंतजार कर रही हैं। मानसून काल में छत से पानी टपकने पुस्कालय में सीलन आ गई थी जो अब तक भी नहीं हट सकी है। ऐसे में हर रोज यहां पहुंचने वाले 150 से अधिक विद्यार्थियों के लिए खतरे के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना मजबूरी बना है। शिक्षा विभाग ने पुस्तकालय के सुधारीकरण के लिए एक साल पहले 1.12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था। कुछ दिन पूर्व इसके सुधारीकरण को लेकर बैठक भी हुई लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। न तो प्रस्ताव को स्वीकृति मिली और न बैठक में कोई नतीजा निकला। कब जर्जर पुस्तकालय का सुधारीकरण होगा और कब विद्यार्थियों को खतरे से मुक्ति मिलेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
पुस्तकालयध्यक्ष का पद रिक्त
जिला पुस्तकालय में पुस्तकालयध्यक्ष और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद रिक्त है। पुस्तकालयाध्यक्ष न होने से यहां विद्यार्थियों के बैठने तक के लिए भी उचित व्यवस्था नहीं हो रही है। विभागीय अधिकारी सिर्फ निरीक्षण तक सीमित हैं। इस अनदेखी के चलते विद्यार्थियों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
कोट
जिला पुस्तकालय के भवन के सुधारीकरण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर ही इसका सुधारीकरण संभव है। - तरुण कुमार पंत, जिला शिक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़