प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश और ओम पर्वत आने के बाद उद्यान विभाग भी इस क्षेत्र के विकास के लिए कार्य योजना बनाने में जुट गया है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उद्यान विभाग काश्तकारों को आत्मनिर्भर बनाएगा। धारचूला और मुनस्यारी के उच्च हिमालयी गांव सेब घाटी के रूप में विकसित किए जाएंगे।
यहां सेब की रेड डेलिसस और गेलगाला के 1508 पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा कलमी नींबू और संतरे के पौधे भी लगाए जाएंगे। न्यू प्लम और अखरोट के पौधों का रोपण भी किया जाएगा। बता दें कि उच्च हिमालयी क्षेत्र बागवानी की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यहां के बागान भविष्य में आदि कैलाश, ओम पर्वत के दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों को भी लुभाएंगे।
अंतिम गांव में प्रयोग रहा सफल
पिथौरागढ़। अंतिम गांव कुटी में सेब का प्रयोग सफल रहा है। यहां अधिकतर काश्तकार सेब के पौधे लगाकर खुशहाल बने हैं। यहां उद्यान विभाग काश्तकारों को मदद करेगा। विभाग का उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।
शीतकालीन कार्य योजना बना दी है। इसे धरातल पर उतारने की कोशिश की जाएगी। अब तक किए गए प्रयोग सफल रहे हैं।
- त्रिलोकी राय, डीएचओ, पिथौरागढ़।