धारचूला से नजंग को जाने वाला रास्ता।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र व्यास घाटी में प्रवास पर गए लोगों की वापसी की राह आसान नहीं है। क्षेत्र में हिमपात के बाद अब ठंड बढ़ने लगी है। एक अक्तूबर से नजंग - लखनपुर सड़क के निर्माण में भी तेजी आएगी । ब्लास्टिंग और लगातार दरकती पहाड़ी के चलते आवागमन ठप है। इससे ऊपरी क्षेत्र में प्रवास पर गए करीब दो हजार लोगों की चिंता बढ़ गई है।
रॉक से करीब दो किमी ऊपर नजंग में रास्ता पूरी तरह ध्वस्त है। पहाड़ी से बड़े बोल्डरों का गिरने का खतरा हर दम बना हुआ है। एक अक्तूबर से यहां सड़क निर्माण के कार्य में तेजी होनी है। इसके चलते मार्ग को पूरी तरह आवागमन के लिए बंद कर दिया है। गुंजी, नाभी, रोंगकोंग, कुटी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, बूंदी आदि गांवों में ग्रीष्मकालीन प्रवास पर ग्रामीण मवेशियों के साथ हैं।
15 अक्तूबर के बाद ग्रामीण निचली घाटियों में प्रवास को आते हैं। इस बार समय से पूर्व हिमपात के चलते ठंड बढ़ने लग गई है। दरकती पहाड़ी से आवागमन इतना कठिन हो गया है आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। 235 मीटर क्षेत्र में लगातार भूस्खलन हो रहा है।
लखनपुर-नजंग के बीच खतरनाक स्थिति होने से अब प्रवास पर गए लोगों को नेपाल के पंपा मंदिर के पास से नदी के रास्ते भारतीय क्षेत्र में लाया जाएगा। उप जिलाधिकारी आरके पांडेय ने बताया कि प्रवास पर गए लोगों को सुरक्षित लाने के लिए नेपाल के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है।
सौ रुपये किलो प्याज, टमाटर
व्यास घाटी के गांवों में राशन और सब्जी की दिक्कत है। रास्ता ध्वस्त होने से ऊपरी क्षेत्र में प्याज और टमाटर का भी संकट बना हुआ है। सामान ढुलान का खर्चा इतना बढ़ जाता है कि प्याज और टमाटर भी ग्रामीणों को सौ रुपये किलो में मिल रहा है।