धारचूला (पिथौरागढ़)। धारचूला के माइग्रेशन वाले सेला गांव तक पहुंचने के लिए पक्का पुल नहीं है। यहां के ग्रामीण साल में दो बार श्रमदान से पुल बनाते हैं।
सेला गांव तक जाने के लिए ग्रामीणों को धौली नदी पार करनी होती है। मार्ग में बहने वाली धौली नदी में बना लोहे का पक्का पुल वर्ष 2013 की आपदा में बह गया था। तब से पक्का पुल नहीं होने से ग्रामीणों को स्वयं श्रमदान से लकड़ी का पुल बनाना पड़ता है। ग्रामीण अप्रैल में माइग्रेशन पर जाते समय लकड़ी का पुल बनाते हैं। बरसात में पुल बह जाता है। इसके बाद माइग्रेशन से वापस लौटने के लिए फिर से ग्रामीणों को लकड़ी का पुल तैयार करना होता है। ग्रामीण नरेंद्र सेलाल ने बताया कि पक्का पुल नहीं होने से आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हर साल सभी ग्रामीण श्रमदान से पुल बनाते हैं। इसमें ग्रामीणों का श्रम और धन दोनों खर्च होते हैं। उन्होंने शासन प्रशासन से शीघ्र धौली नदी पर पुल बनाने की मांग की है।