पिथौरागढ़/अस्कोट/थल/नाचनी। सीमांत जिले में वसंत पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान घरों में ज्ञान की आराध्य देवी मां सरस्वती की पूजा की गई। साथ ही उन्हें मीठे पकवान का भोग लगाया गया। कई जगहों पर बटुकों के यज्ञाेपवीत संस्कार किए गए।
पर्व पर श्रद्धालुओं ने सुबह नदी तट पर स्नान कर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। मां सरस्वती को सरसों के पीले फूल अर्पित किए गए। बच्चियों के नाक-कान छेदन के लिए स्वर्णकारों की दुकानों में भीड़ रही। सरयू, रामगंगा तट पर कई जगहों पर घरों में बटुकों के जनेऊ संस्कार किए।
कई निजी स्कूलों में विद्यारंभ कार्यक्रम भी हुए। उधर अस्कोट के श्री मल्लिकार्जुन महादेव मंदिर में पं. नारायण दत्त पंत ने भोग लगाया। इस दौरान मंदिर में माघ खिचड़ी का आयोजन किया गया। हंसेश्वर मठ में अखंड रामायण का हवन, भंडारे के साथ समापन हुआ।
मठाधीश महंत परमानंद गिरि ने बताया कि 8 बच्चों का जनेऊ संस्कार और मुंडन किया गया। इधर थल के पौराणिक बालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर और संगम तट पर कई बटुकों के उपनयन संस्कार किए गए। इधर, नाचनी में सरस्वती शिशु मंदिर में मां सरस्वती का पूजन कर हवन किया गया। प्रसाद वितरण में जीवन दानू, प्रधानाचार्य एमडी चौसाली, कुंदन राम, चंद्रप्रकाश द्विवेदी, नीतू चुफाल, जानकी, मथुरा दत्त जोशी, दीपू चुफाल आदि मौजूद रहे। संवाद
परंपरागत ढंग से मनाया वसंत पंचमी पर्व
चंपावत/बनबसा। जिला मुख्यालय के बालेश्वर मंदिर में वसंत पंचमी पर माघ खिचड़ी का आयोजन किया गया। भगवान को भोग अर्पित कर ग्रहण किया। सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। मानेश्वर मंदिर के महंत पवन गिरि ने बताया कि मकर संक्रांति के अवसर पर बालेश्वर मंदिर में घृत कमल से स्नान कराने के बाद पूरे शिवलिंग को घी से ढक दिया गया।
इस दौरान व्यापार संघ नगर अध्यक्ष विकास साह, पूर्व पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा, शंकर पांडेय, रितेश राय, मुक्तेश वर्मा, सुनील पुनेठा आदि रहे। वहीं बनबसा में भी परंपरागत ढंग से वसंत पंचमी पर्व मनाया गया। घरों में पूजा अर्चना के बाद पीले वस्त्र धारण किए गए। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना की। कई लोगों ने व्रत रखा और पकवान बनाए।
उधर, टुकटुक यूनियन ने पाटनी तिराहे पर खिचड़ी भोग वितरित किया। अध्यक्ष नरेश कुमार कश्यप ने बताया कि कन्याओं को भोग लगाने के बाद भंडारा शुरू हुआ। इसमें सुनील गुप्ता, नरेंद्र गुप्ता, रवि गुप्ता, बनवारी लाल कश्यप, राजवीर आदि ने सहयोग किया।
बच्चों ने की जमकर पतंगबाजी
चंपावत। वसंत पंचमी पर रामेश्वर, पंचेश्वर घाटों में सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया। श्रद्धालुओं ने सुबह स्नान कर इष्ट देवता के मंदिरों में पूजा अर्चना कर खुशहाली की कामना की। इधर गुमदेश क्षेत्र के जाख जिंडी भूमिया मंदिर में सामूहिक पूजा अर्चना की गई। पुरोहित मदन कलौनी ने पूजा अर्चना कराई। इस दौरान कमल सिंह प्रथोली, गुमान सिंह प्रथोली, भैरव सिंह, सोबन सिंह, प्रहलाद सिंह आदि मौजूद रहे।
वसंत आया, किसान हाट में मायूसी लेकर आया
चंपावत। जिला मुख्यालय के रोडवेज स्टेशन में किसान हाट का आयोजन किया गया, लेकिन किसान हाट में मात्र चार ही काश्तकार अपने उत्पाद लेकर पहुंचे। इससे बाजार में दिन भर सन्नाटा रहा। रविवार को रोडवेज स्टेशन में आयोजित किसान हाट में किसान दीवान सिंह बताया कि पर्व के चलते अन्य जगह से आने वाले काश्तकार और खरीदारी भी कम आए।
भागवत कथा सुनने दूर दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु
लोहाघाट (चंपावत)। नेपाल सीमा से लगे रौंसाल गांव में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा के चौथे दिन सुबह पुरोहित दीपक चंद्र पांडेय ने अनुष्ठान संपन्न कराएं। दोपहर बाद व्यास अवधेश शास्त्री ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा जब-जब अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। कथा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंची भजन मंडली ने मन मोहक प्रस्तुति दी। कथा आयोजक संजय कुमार भट्ट, कमल सामंत, योगेश चंद्र भट्ट, दीपक सामंत, दीपक कोठारी, चेतराम भट्ट, दीपक भट्ट, गोविंद बल्लभ भट्ट ने सभी का स्वागत किया।
बरगद और पीपल के वृक्षों का कराया विवाह
बनबसा (चंपावत)। बनबसा के बमनपुरी गांव के भूमिया मंदिर में बरगद और पीपल के वृक्षों का विवाह हुआ। वधू पक्ष (पीपल) की ओर से जीवन सिंह नेगी, भावना नेगी और वर पक्ष (बरगद) की ओर से भुवन भट्ट, रेखा भट्ट ने लग्न की प्रक्रिया पूरी की। पंडित दयाकिशन पंत अनुष्ठान संपन्न कराया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। आयोजन में प्रशासक भावना नेगी, विमला सजवान, जनक जोशी, दीपू रौतेला, त्रिलोचन जोशी, हरीश जोशी, सुरेंद्र बिष्ट, गीता पंत आदि ने सहयोग किया। भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।