शताब्दी समारोह पर वीर योद्धा स्थल के उद्घाटन पर मौजूद सेना के अधिकारी
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सेना की तीन कुमाऊं राइफल्स के शताब्दी समारोह के दौरान रविवार को छावनी क्षेत्र में वीर योद्धा स्थल का उद्घाटन हुआ। यह स्थल मातृभूमि की रक्षा करने वाले वीरों के नाम पर समर्पित है। वीर योद्धा स्थल का निर्माण सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एसी सरदेश पांडे (अति विशिष्ट सेवा मेडल) ने कराया। ले. जनरल पांडे ने तीन जून 1965 को कमीशन प्राप्त कर तीन कुमाऊं राइफल्स में सेवा शुरू की। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय 12 कुमाऊं रेजीमेंट की कमान संभाली थी।
वीर योद्धा स्थल का उद्घाटन सेवानिवृत्त मेजर डीएन पांडे और सेवानिवृत्त आनरेरी कैप्टन गुलाब सिंह ने किया। कार्यक्रम में ले. जनरल सरदेश पांडे भी मौजूद रहे। सेना के अधिकारियों ने बताया कि तीन कुमाऊं राइफल्स पहली कुमाऊंनी बटालियन है। 23 अक्तूबर 1917 को गठित इस सेना ने ही कुमाऊंनियों को लड़ाकू कौम होने की पहचान दी।
प्रथम कुमाऊंनी बटालियन के सौ वर्ष पूरे होने को गौरवशाली क्षण बताते हुए कहा गया कि इस बटालियन ने युद्ध में वीरता के कई कीर्तिमान स्थापित किए। वीर योद्धा स्थल के उद्घाटन के समय सेना के अधिकारी, जवान, पूर्व सैनिक समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
संगीत संध्या में खूब झूमे दर्शक
तीन कुमाऊं राइफल्स के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य पर शनिवार रात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची रही। कुमाऊं की संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमों के साथ-साथ पूर्वोत्तर की संस्कृति पर भी कार्यक्रम हुए। देशभक्ति गीतों से पूरा वातावरण गूंज गया। छावनी क्षेत्र में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी, जवान शामिल हुए। जवानों ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रम पेश कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस कार्यक्रम में वीर नारियों के साथ ही सेना के वरिष्ठ अधिकारी और उनके परिवार के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में मौजूद राष्ट्रपति के सैन्य सचिव मेजर जनरल अनिल खोसला (सेना मेडल, विशिष्टि सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल) की पत्नी उषा खोसला ने कलाकारों को पुरस्कार बांटे।