नामिक गांव में नहर की मरम्मत के लिए खुद जुटी महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
जिस काम को अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) नहीं कर पा रहा था, उस काम को नामिक की महिलाओं ने अपने दम पर कर दिखाया। आखिर मामला भी उनके अपने गांव की बिजली का था। नामिक को बिजली सप्लाई करने वाली हीरामणि लघु जल विद्युत परियोजना की बर्फबारी और बारिश के कारण क्षतिग्रस्त नहर के ठीक होने की सूरत न देख महिलाओं ने गांव से लोहे का पाइप के जरिए नहर में पानी पहुंचाकर गांव की बिजली बहाल की।
नामिक में 5 और 6 मार्च को हुई बर्फबारी और बारिश के दौरान बिजली परियोजना की नहर करीब 6 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। हद तो यह हुई की बार-बार सूचना देने पर भी उरेडा ने नहर की मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया। पहले किए गए काम का भुगतान न होने से गांव के पुरुषों ने नहर मरम्मत में कोई रुचि नहीं दिखा रहे थे, तब गांव की महिलाओं ने 86 परिवारों को बिजली देने वाली 50 किलोवाट की परियोजना में पानी चलाने की ठानी। 18 मार्च को नंदी देवी, जयंती देवी, द्रौैपदी देवी, कमला देवी, लछिमा देवी, गोपुली देवी आदि महिलाओं ने पावर हाउस में पड़े लोहे के दो पाइपों को दो किलोमीटर दूर क्षतिग्रस्त नहर तक ढोकर पहुंचाया। नहर में आने के बाद गांव में बिजली बहाल हो गई।
हीरामणि लघु जल विद्युत परियोजना समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह टाकुली का कहना है कि समिति के पास धन की कमी है। समिति अपने स्तर से नहर की मरम्मत कराने में सक्षम नहीं है। बताते हैं कि प्रत्येक कनेक्शन धारक से 50 रुपये प्रतिमाह वसूूला जाता है। परियोजना की देखरेख के लिए दो लाइनमैन 2000-2000 रुपये प्रतिमाह पर रखे गए हैं। टाकुली बताते हैं कि परियोजना में लगे दो ट्रांसफार्मरों में से एक ट्रांसफार्मर अगस्त 2016 से फुंका है। एक ही ट्रांसफार्मर से पूरे गांव को बिजली दी जा रही है। उस पर लोड बढ़ रहा है। कभी भी वह ट्रांसफार्मर भी फुंक सकता है। विभाग ट्रांसफार्मर बदल नहीं रहा है।
नहर की मरम्मत के लिए शासन से धन की मांग की गई है। ट्रांसफार्मर की मरम्मत के लिए बाहर से मैकेनिक बुलाया जा रहा है। वह स्वयं उसे लेकर नामिक जाएंगे।
- वंशीधर साठी, जूनियर इंजीनियर उरेडा