भाषण देते भारतरत्न प्रो. सीएनएन राव
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हिमालयन ग्राम विकास समिति (एचजीवीएस) के इंदुमति राव सभागार में हर साल की तरह ही इस बार भी साइंस आउटरिच प्रोग्राम शुरू हो गया है। प्रोग्राम का शुभारंभ भारत रत्न प्रोफेसर सीएनआर राव, पद्मभूषण डा. केएस वल्दिया, विख्यात समाजसेवी राधा बहन, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एचएस धामी ने दीप जलाकर किया।
प्रथम सत्र में जवाहर नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च के प्रोफेसर भारत रत्न राव ने रसायन विज्ञान के इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर बोलते हुए कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में असीमित अवसर मौजूद हैं, जिनका छात्र-छात्राओं को लाभ उठाना चाहिए। कुलपति धामी ने गणित विषय पर बोलते हुए कहा कि ज्ञान की सीमा है, परंतु कल्पना की कोई सीमा नहीं है। इसलिए कल्पना करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने लीक से हटकर सोचने की जरूरत बताई। इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी मोहाली के निदेशक प्रोफेसर एके गांगुली ने विज्ञान की उपयोगिता पर कहा कि आज विज्ञान नित नए आयाम छू रहा है। नैनो तकनीक भविष्य की तकनीक है और इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।
द्वितीय सत्र में जेएनसीएएसआर बंगलूरू के प्रोफेसर एन चंद्रभाष ने वर्तमान समय में शोष कार्य में प्रकाश एवं अनुपयोगों के संबंध में बोलते हुए प्रमाण एवं पदार्थों की संरचना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। प्रोफेसर उदय रंगा ने बताया कि एंटी बॉडी तकनीक की सहायता से एचआरईबी वायरस को नियंत्रित किया जा सकता है। उत्तराखंड साइंस एजूकेशनल एवं रिसर्च सेंटर के निदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पंत ने कंप्यूटर और इसके अनुपयोगों के संबंध में जानकारी देते हुए भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं से अवगत कराया। विज्ञान गल्फकार डा. देवेंद्र मेवाड़ी ने प्रोजेक्टर पर सौरमंडल का सजीव प्रदर्शन किया। अंतरिक्ष के गहन रहस्यों से परिचित कराया।
तीन दिनी प्रोग्राम के लिए प्रोफेसर उमेश बाघमरे, प्रोफेसर बीडी लखचौरा, प्रोफेसर एचएन अग्रवाल, प्रोफेसर गंगा बिष्ट, प्रोफेसर केएस कठायत, पंतनगर विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर पीएस महर, इतिहासकार प्रोफेसर शेखर पाठक गंगोलीहाट पहुंचे हैं। एचजीवीएस के अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर के 24 स्कूलों के 160 विद्यार्थी और शिक्षक प्रोग्राम में हिस्सा ले रहे हैं। साइंस आउटरिच प्रोग्राम वर्ष 2009 से हर साल एचजीवीएस में हो रहा है। प्रोफेसर सीएनआर राव समेत तमाम वैज्ञानिक पिछले 8 साल से इस कार्यक्रम में आते रहे हैं।