महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लाइन में लगी गर्भवतियां और उनके परिजन। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की मार गर्भवतियों को भी सहनी पड़ रही है। एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट होने से गर्भवतियों के लिए समय पर अल्ट्रासाउंड कराना चुनौती बना है। रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर जाने से बीते छह दिनों से महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड शिविर नहीं लगा। ऐसे में गर्भवतियों की जांच नहीं हो सकी। रेडियोलॉजिस्ट अवकाश से लौटे तो भीड़ अधिक होने से गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड कराने में पसीने छूट गए।
जिले भर में सिर्फ जिला अस्पताल में ही रेडियोलॉजिस्ट है। एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट पर जिले भर के मरीजों और गर्भवतियों की अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी है। गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड करने के लिए महिला अस्पताल में सप्ताह में दो दिन बुधवार और शुक्रवार को शिविर लगता है। रेडियोलॉजिस्ट के छह दिन अवकाश पर रहने से बीते शुक्रवार को शिविर नहीं लगा। ऐसे में महिला अस्पताल पहुंचीं जिले भर की गर्भवतियों को बैरंग लौटना पड़ा। रेडियोलॉजिस्ट अवकाश से लौटे तो बुधवार को अल्ट्रासाउंड शिविर लगा।
लंबे समय बाद शिविर लगने से धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, थल सहित अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में गर्भवतियां अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पहुंची। भीड़ अधिक होने से गर्भवतियों को लाइन में लगकर अपनी बारी का लंबा इंतजार करना पड़ा। रेडियोलॉजिस्ट ने बारी-बारी से 60 से अधिक गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड किया। जांच होने से गर्भवतियों को राहत मिली। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. रामबाबू ने बताया कि शिविर में पहुंची सभी गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड किया गया।