धारचूला तहसील के अंतर्गत पांगला थाने में तैनात दो पुलिस कर्मियों की सोमवार को मोटरसाइकिल खाई में गिरने से मौत हो गई। यदि मोटरसाइकिल पत्थरों पर नहीं रुकती तो दोनों महाकाली में गिर जाते। दोनों पुलिस कर्मियों के शवों का मंगलवार को जिला मुख्यालय में पोस्टमार्टम किया गया और अंतिम संस्कार के लिए उनके गांव भेज दिए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक अजय जोशी ने बताया कि पांगला थाने में तैनात कांस्टेबल नितीश शर्मा (26) पुत्र राकेश शर्मा निवासी फुलसुंघा, ट्रांजिट कैंप रुद्रपुर जिला ऊधमसिंह नगर और कांस्टेबल सत्येंद्र सिंह नेगी (30) पुत्र चंद्र सिंह निवासी धूमाकोट पौड़ी गढ़वाल अपनी पल्सर बाइक (यूके 05 जीए-0050) से पांगला थाने से तवाघाट की तरफ गश्त पर जा रहे थे। अपरान्ह 1.30 बजे उनकी बाइक गस्कू के रोड पर पड़े पत्थरों से टकराकर 200 फुट गहरी खाई में जा गिरी। बाइक चला रहे नितीश शर्मा ने हेलमेट पहना था और हाथों में दस्ताने भी पहने थे।
गस्कू के पास ड्यूटी दे रहे एसएसबी के जवान विक्रम सिंह बोरा ने बाइक को खाई में गिरते देख लिया और एसएसबी की 11वीं वाहिनी को इसकी सूचना दी। साथ ही पांगला थाने को भी सूचित किया। इस पर थाना प्रभारी महेश चंद्र पांडे, एसएसबी के सहायक सेनानी अजय सिंह यादव, उपनिरीक्षक चंद्रा सिंह और दस जवान घटनास्थल पहुंचे। रस्सियों के सहारे 200 फुट गहरी खाई से दोनों शवों को बाहर निकाला। दुर्घटनाग्रस्त बाइक महाकाली नदी से थोड़ा ऊपर बड़े पत्थरों में अटक गई थी। पत्थरों में सिर टकराने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
धारचूला के एसडीएम राजकुमार पांडे, सीओ चंद्रशेखर सुयाल, थाना धारचूला के प्रभारी अजय साह भी मौके पर पहुुंचे और पुलिस कर्मियों के शवों को धारचूला संयुक्त चिकित्सालय लाए। सीओ चंद्रशेखर सुयाल ने बताया कि दोनों पुलिस कर्मियों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। वहीं, मंगलवार दोपहर जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन में एसपी अजय जोशी, सीओ हिमांशु साह समेत तमाम पुलिस कर्मियों ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी। एसपी ने बताया कि विशेष वाहन से दोनों शव उनके मूल गांव भेज दिए गए हैं। सत्येंद्र सिंह नेगी वर्ष 2006 में पुलिस में भर्ती हुए थे, जबकि नितीश शर्मा ने 2012 में पुलिस की नौकरी ज्वाइन की थी। वह अविवाहित था, जबकि सत्येंद्र सिंह की दो बेटियां हैं।
खराब रोड बनी दुर्घटना का कारण
धारचूला। तवाघाट से पांगला के बीच की सड़क पर पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरते रहते हैं। अक्सर यह पत्थर वाहन चालकों के सिर पर और वाहनों में भी लगते हैं। आशंका जताई जा रही है कि पुलिस कर्मियों की बाइक भी पहाड़ी से गिरे पत्थरों से टकराने के बाद असंतुलित हो गई होगी। इस रोड के सुधारीकरण का काम सीमा सड़क संगठन दस वर्षों से कर रहा है, लेकिन खतरा कम नहीं हुआ है।
गश्त के लिए दोपहिया का ही उपयोग
धारचूला। पांगला थाने में गाड़ी नहीं है। इस कारण गश्त के लिए पुलिस कर्मियों को मोटरसाइकिल का ही सहारा लेना पड़ता है। पुलिस ने जिन थानों में गाड़ियां नहीं हैं, वहां मोटर साइकिल दे रखी हैं। यदि गश्त के समय यह लोग चौपहिया वाहन का उपयोग करते तो शायद हादसा टल जाता। उस इलाके में दोपहिया से सफर करना खतरे से खाली नहीं है।