पिथौरागढ़। सगंध पौधा केंद्र (कैप) सेलाकुई की ओर से मुनस्यारी क्षेत्र के गांवों को तिमूर का हब बनाने की कवायद की जा रही है। यहां के 200 किसानों को तिमूर की खेती से जोड़ा गया है।
केंद्र की ओर से जिला मुख्यालय के पास स्थित विषाड़ नर्सरी में नीम तिमूर के 3,000 पौधे लगाए गए हैं। कैप के जिला प्रभारी सुनील सिंह वर्तवाल ने बताया कि 4.5 हेक्टेयर क्षेत्र की नर्सरी में 18 प्रजाति के डेमो पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि नर्सरी में उगाए पौध किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। मुनस्यारी के धापा, दुम्मर, दरांती, दरकोट गांवों में करीब पांच हेक्टेयर में तिमूर के 5,000 पौधे लगाए गए हैं।
लोगों की आर्थिकी को बढ़ाने के लिए अन्य गांवों के ग्रामीणों को भी इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पहले से जो किसान अपनी नाम भूमि में तिमूर की खेती कर रहे हैं, उनका भी पंजीकरण किया जा रहा है जिससे कि उन्हें इसके विपणन में किसी भी तरह की दिक्कत न हो।
दुम्मर के बीज से दून में बनेगी हाईटेक नर्सरी
पिथौरागढ़। सगंध पौधा केंद्र सेलाकुई की ओर से देहरादून में तिमूर की हाईटेक नर्सरी तैयार की जा रही है। कैप के जिला प्रभारी सुनील सिंह वर्तवाल ने बताया कि नर्सरी के लिए मुनस्यारी के दुम्मर गांव के किसानों से तिमूर का बीज खरीदा जाएगा। तिमूर की कीमत 500-600 रुपये किलो है।
रक्तचाप को नियंत्रित करता है तिमूर
पिथौरागढ़। पर्वतीय क्षेत्र में पाई जाने वाली वनौषधि तिमूर दांतों में लगने वाले पायरिया रोग में भी बेहद कारगर रहता है। जानकार लोग इसका उपयोग दातून के रूप में करते हैं। इसकी टहनियों से बनी दवा रक्तचाप नियंत्रित करती है। तिमूर का वैज्ञानिक नाम जेनथोजायलम अर्मेटम है। इसका प्रयोग मसालों के रूप में भी किया जाता है। जाड़ों में सीमांत के लोग इसके सूप का प्रयोग शरीर को गर्म रखने में करते हैं। तिमूर के पौधे में कांटे होने से यह जंगली जानवरों से खेती की सुरक्षा करने में भी कारगर है। कई लोग तारबाड़ के लिए भी खेतों के किनारे भी तिमूर के पौधे लगा देते हैं।