ठुलीगाड़ में पानी न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। इस कारण पंपिंग योजना के लिए पानी जुटाने में भारी अड़चन आने लगी है। इस समय जल संस्थान सिर्फ एक पंप को चलाकर थोड़ा पानी लिफ्ट कर पा रहा है। आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप लेने वाली है। अन्य वर्षों में ठुलीगाड़ का पानी मई मध्य से कम होने लगता है। प्रचंड गर्मी के समय जब नदी-नाले सूखने लगते हैं उसी समय ठुलीगाड़ का पानी भी कम होता था, लेकिन इस बार अभी से ही ठुलीगाड़ में पानी का स्तर बहुत कम हो गया है।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा ने बताया कि इस समय सिर्फ एक पंप को चलाने लायक पानी मिल पा रहा है। 24 घंटे यदि एक पंप चलाया जाए तो बड़ी मुश्किल से 1.5 से 2 लाख लीटर पानी एकत्र हो पा रहा है। पानी कम होने के कारण कभी-कभी बीच में पंप बंद करने पड़ रहे हैं। जल संस्थान के अधिकारी इस बात से आशंकित हैं कि यदि आने वाले दिनों में ठुलीगाड़ का पानी पूरी तरह सूख गया तो फिर कैसे पूर्ति की जाएगी। वर्ष 2000 में बनी ठुलीगाड़ पंपिंग योजना से नगर के करीब 40 फीसदी हिस्से को पानी की सप्लाई की जाती है।
कैसे आई ऐसी नौबत
ठुलीगाड़ का पानी कम होने के पीछे मुख्य कारण यह है कि सेना ने पंपिंग योजना के ठीक ऊपर आवासीय कालोनी बनाने का काम शुरू किया है। वहीं पर पेयजल की टंकी भी बन रही है। ठुलीगाड़ पंपिंग योजना पर इसका असर पड़ने की आशंका एक वर्ष से उठ रही थी। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा ने बताया कि अब आवासीय भवनों के निर्माण के लिए ठुलीगाड़ का पानी पहले ही रोक दिया जा रहा है। उन्होंने अपने स्तर से एमईएस के गैरीजन इंजीनियर, डीएम, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र लिखकर समस्या की जानकारी दे दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले का समाधान डीएम के स्तर से ही संभव हो पाएगा।
सेना के अधिकारियों से बात करेंगे : डीएम
डीएम एचसी सेमवाल ने कहा कि ठुलीगाड़ पंपिंग योजना का पानी नहीं रोकने के लिए सेना के अधिकारियों से बात की जाएगी। पहले भी इस बारे में सेना के अधिकारियों से बात हो चुकी है और तब यह तय हुआ था कि पंपिंग योजना के लिए पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। अब संकट बढ़ रहा है इसलिए सेना के अधिकारियों से तत्काल बात की जाएगी।