चैत्राष्टमी पर बृहस्पतिवार को मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। जिला मुख्यालय के पास उल्का देवी मंदिर, कामाक्षा मंदिर में सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी। लोगों ने घरों में भी देवी के महागौरी रूप का पूजन किया। गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर में बृहस्पतिवार सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट गई। गंगोलीहाट में अष्टमी का मेला लगा। शांति व्यवस्था के लिए पुलिस का व्यापक बंदोबस्त किया गया था। पांखू के पास कोटगाड़ी मंदिर में भी बृहस्पतिवार को सैकड़ों भक्त पहुंचे। लोगों ने देवी के मंदिर में पूजा-अर्चना की।
नाचनी के पास होकरा मंदिर में बृहस्पतिवार को सैकड़ों की संख्या में भक्त पहुंचे। कठिन रास्तों के बावजूद लोगों में अपार उत्साह देखने को मिला। बृहस्पतिवार को मौसम साफ होने के कारण दूर-दूर से लोग मंदिर में पहुंचे थे। मंदिर में सुबह से ही पूजा अर्चना शुरू हो गई थी। उधर, आंवलाघाट के चंडिका मंदिर, मड़ के चंडिका मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ रही। चैत्र नवरात्र का बड़ा महत्व है। लोग नवरात्र में देवी की स्तुति करते हैं और सुख, शांति की प्रार्थना करते हैं।
चैत्राष्टमी को नेपाल में 80 भैंसों की बलि
बैतड़ी/झूलाघाट (पिथौरागढ़)। बैतड़ी के निगलासैनी भगवती मंदिर में चैत्राष्टमी को लगे मेले में 80 भैंसों और 65 बकरियों की बलि दी गई। नेपाल में पशुबलि प्रथा पर कोई रोक नहीं है। मेले में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। भारतीय क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचे। बैतड़ी के जिलाधिकारी लीलाधर अधिकारी ने बताया कि मेले में शांति व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। हजारों की संख्या में लोगों के आने के बावजूद शांति व्यवस्था बनी रही। बैतड़ी के निगलासैनी मंदिर की काफी मान्यता है। इस देवी को मनोकामना पूरी करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।