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वीरान पहाड़ी पर पेड़ लगाकर पाया पानी

Tue, 16 May 2017 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, डीडीहाट (पिथौरागढ़)। 
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पेड़ लगाकर पाया पानी - फोटो : amar ujala
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। ग्राम पंचायत कांडे की पहाड़ी पर स्थित बैकुंठधाम को देखकर तो ऐसा लगता है कि यदि पहाड़ों पर पेड़ लगाए जाएं तो जरूर पानी के स्रोत जागृत हो जाएंगे। 1982 में गुजरात के एक साधु भास्कर स्वामी की ओर से शुरू किए गए इस प्रयास का फल लोगों को मिलने लगा है। बैकुंठधाम में साधु की इस पहल को संरक्षित करने के लिए बैकुंठधाम ट्रस्ट के लोग बेहद संजीदा हैं। उस इलाके में रोपे गए पौधों को काटने की अनुमति नहीं है। पेड़ों तथा अन्य प्रकार की वनस्पति की सुरक्षा के लिए एक चौकीदार भी तैनात किया गया है।
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बताया गया कि 1982 में गुजरात के संन्यासी भास्कर स्वामी अचानक ग्राम कांडे की वीरान पहाड़ी पर रहकर तपस्या करने लगे। उस समय पूरे इलाके में पानी का कोई स्रोत नहीं था। भास्कर स्वामी ने सबसे पहले बंजर जमीन पर बांज, रिंगाल के पौधों का रोपण किया।

उनको स्थानीय लोगों ने जानकारी दी थी कि बांज की जड़ों में पानी के स्रोतों को रिचार्ज करने की क्षमता होती है। वह खुद ही पेड़ों की रक्षा करने लगे और पेड़ों के आसपास उगने वाली अन्य प्रकार की वनस्पति एवं घास को भी नहीं काटा। कुछ ही वर्षों में कांडे की यह वीरान पहाड़ी हरीभरी हो गई।
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लोग बताते हैं कि सिर्फ छह साल बाद 1988 में मानसून सीजन में धाम की पहाड़ी पर जंगलों के बीच पानी का एक स्रोत फूट गया। ट्रस्ट के लोग इससे उत्साहित हो गए। 2005 में इस स्थान पर एक कुआं खोदने का निर्णय लिया गया। कुएं को 15 फुट तक खोदा था कि उसमें पानी की धार निकल आई। धाम के एमडी डीएस पांगती ने बताया कि भास्कर स्वामी के निधन के बाद पौधरोपण की मुहिम को ज्यादा तेज किया गया।

हर साल वन विभाग, आईटीबीपी की मदद से इस इलाके में 500 पौधों का रोपण किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस समय गर्मी के मौसम में भी धाम के कुएं में लगातार पानी मिलता है। जाड़ों और बारिश के मौसम में यह कुआं पानी से लबालब भर जाता है।

पांगती कहते हैं कि धाम आने वाले पर्यटकों के लिए अब पेयजल की कोई समस्या नहीं है। सिर्फ 35 साल की मेहनत से ही पानी का नया स्रोत प्राप्त करने में कामयाबी मिली है। इस मुहिम को रुकने नहीं दिया जाएगा। कुएं और स्रोत के पानी को संग्रह कर टंकी बनाई गई है। उसी से लोग पानी भरते हैं।

डीडीहाट। बैकुंठधाम के एमडी डीएस पांगती का कहना है कि जिस तरह का प्रयोग धाम में हुआ है वैसा ही अन्य स्थानों पर भी किया जा सकता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के रिटायर्ड प्राचार्य पांगती का कहना है कि जिन स्थानों पर बांज के उगने लायक जलवायु हो वहां पर इसका रोपण करना चाहिए। ऐसा करने से पहाड़ पर पानी के संकट से मुक्ति मिल जाएगी।
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