पिथौरागढ़। सीमांत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे तो खूब हो रहे हैं जो धरातल पर बेअसर हैं। सरकारी फाइलों में दम तोड़ रहा ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव इसका प्रमाण है। सीमांत जिले में ट्रामा सेंटर सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रहा है और दुर्घटना में घायल अपनी जान बचाने के लिए हायर सेंटर की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं।
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील सीमांत जिले में आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। दुर्घटना में घायलों की जान बचाने के लिए जिले में राज्य गठन के बाद से ही ट्रामा सेंटर की मांग की जा रही है। राज्य गठन के 24 साल बाद भी ट्रामा सेंटर बनाने के प्रयास नहीं हुए। हालांकि इसकी घोषणा की गई। बाकायदा अप्रैल 2017 में भ्रमण पर पिथौरागढ़ पहुंचे तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जनता दरबार में शामिल होकर ट्रामा सेंटर खोलने का दावा कर डेढ़ करोड़ रुपये मंजूर करने का वादा किया था। हैरानी है कि आज तक ट्रामा सेंटर का पता नहीं है। ट्रामा सेंटर खोलने का विभागीय प्रस्ताव भी सरकारी फाइलों में धूल फांक रहा है और दुर्घटना में घायल अपनी जान बचाने के लिए हल्द्वानी, बरेली की दौड़ लगा रहे हैं।
हायर सेंटर पहुंचने से पहले 15 ने तोड़ा दम
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बीते दो साल में सड़क सहित अन्य दुर्घटनाओं में 70 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय अस्पतालों में बेहतर उपचार न होने से 40 घायलों को हायर सेंटर रेफर किया गया। 15 घायल ऐसे थे जो हायर सेंटर पहुंचने से काल के गाल में समा गए। स्थानीय स्तर पर ट्रामा सेंटर की सुविधा मिलती तो इनमें से कई घायलों की जान बचाई जा सकती थी।
सीएमओ डॉ. एचएस ह्यांकी का कहना है कि ट्रामा सेंटर खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति के बाद ही यह संभव है। घायलों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल सके इसके लिए विभाग गंभीर है।