पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में 20 साल पहले आम लोगों की जरूरत माने जाने वाली रोडवेज की 10 बसों का संचालन बंद हो गया है। इन बसों के सहारे ही लोग पिथौरागढ़ से ग्रामीण क्षेत्र तक का सफर करते थे, लेकिन टैक्सी वाहनों के आने से इन बसों का संचालन रोडवेज को बंद करना पड़ा। 12 से अधिक स्थानों तक चलने वाली इन बसों का संचालन अब पूरी तरह बंद हो चुका है।
राज्य गठन से पहले रोडवेज की बस ही यातायात का साधन होती थी। लोग इन बसों के भरोसे ही आवाजाही करते थे। यह बसें बुंगाछीना, मुवानी, थल, पसमा, भागीचौरा, पीपली, मड़मानले, गणाईगंगोली, डीडीहाट, धारचूला, सोबला, तवाघाट, मदकोट, मुनस्यारी, राईआगर, चौड़मन्या, गुरना, जाखपुरान, बड़ाबे, गुरना तक चलतीं थीं। तब इन बसों में किराया बेहद कम था। पहाड़ की इन विषय परिस्थितियों में लोग सोबला से पिथौरागढ़ आते थे। अपनी जरूरत की चीजें रोडवेज की बसों में रखकर घर तक पहुंचाते थे। 90 के दशक तक धारचूला और डीडीहाट से बरेली, दिल्ली, लखनऊ और इलाहाबाद के लिए भी सीधी बस सेवाएं थीं लेकिन बाद में टैक्सी बढ़ने से आए घाटे के कारण धीरे-धीरे बसों का संचालन बंद हो गया। अब ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य स्थानों के लिए लोग टैक्सी वाहनों का सफर करते हैं।
तवाघाट की यात्रा का सफर रहता था चार दिन
पिथौरागढ़। धारचूला से तवाघाट का सफर तीन दिन का रहता था। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले हर गांव के लोग इस बस से अपनों से मिलते हुए रोडवेज की बसों से वापस आते थे। रोडवेज की बस मुनस्यारी से डीडीहाट, मुनस्यारी से मुवानी होकर पिथौरागढ़ तक चलती थी।
दिल्ली रूट पर चल रहीं सबसे अधिक बसें
पिथौरागढ़। अभी उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) 24 बसों का संचालन कर रहा है। इनमें से दिल्ली के लिए 10, देहरादून के लिए चार बसें चल रही हैं। शेष बसें जौलजीबी, थल, मुनस्यारी, झूलाघाट तक चल रही हैं।
पहले रोडवेज की बसें सीमांत के हर क्षेत्र में चलती थी। इन्हीं के सहारे लोग आवाजाही करते थे। पिछले 20 साल में सीमांत के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 10 बसों का संचालन बंद हुआ है।
- आरपी पांडे, प्रभारी, रोडवेज स्टेशन, पिथौरागढ़।