परिवहन निगम पहाड़ पर यात्री सेवाओं पर ध्यान नहीं दे रहा। जरूरत के बाद भी बंद पड़ी 15 सेवाओं के संचालन पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। सालों पहले प्रबंधन की लचर कार्यशैली के चलते 13 अंतर जनपदीय समेत 15 बस सेवाएं बंद हो गई थी, जबकि सभी सेवाएं लाभ में चल रही थी। इसका खामियाजा यात्री टैक्सी चालकों की मनमानी के रूप में भुगत रहे हैं।
राज्य गठन से पहले परिवहन निगम जिले के 13 आंतरिक मार्गों पर नियमित और शटल बस सेवाओं का संचालन करता था। वर्ष 1998 तक जिले के एक दर्जन से अधिक आंतरिक मार्गों पर बस सेवाओं का संचालन होता था। उस दौरान पहाड़ की बड़ी आबादी आवागमन के लिए इन बसों पर निर्भर थी, लेकिन इस बीच लचर प्रबंधन के चलते एक-एक कर सभी अंतर जनपदीय सेवाओं को बंद कर दिया गया, जबकि ये सभी सेवाएं लाभ में चल रही थी। इन रूटों पर सरकारी परिवहन सेवाएं बंद होने के बाद निजी संचालकों का एकाधिकार हो गया। तब से लोग परिवहन के लिए निजी टैक्सी चालकों पर निर्भर हो गए हैं।
बस सेवा बहाल करने की मांग
परिवहन निगम के बंद पड़े रूटों पर फिर से बस सेवा बहाल करने की मांग उठने लगी है। बेड़ीनाग विकास खंड में मनमाना किराया वसूलने और रोडवेज सेवा शुरू करने के संबंध में प्रस्ताव तक पास हो चुका है। इसके साथ ही गुरना, पिपरी, भागीचौरा, देवलथल, बांस आदि क्षेत्र के ग्रामीणों ने परिवहन सेवा फिर शुरू करने की मांग उठाई है। ग्राम प्रधानों ने परिवहन निगम को बस सेवा बहाल करने के लिए प्रस्ताव दिया है। निगम के सहायक प्रबंधक राजेंद्र आर्य का कहना है कि प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है।
पिथौरागढ़ डिपो की बंद हुई सेवाएं
पिथौरागढ़-गुरना, पिथौरागढ़-गंगोलीहाट, पिथौरागढ़-बड़ावे, पिथौरागढ़-धारचूला, पिथौरागढ़-मदकोट, पिथौरागढ़-मुनस्यारी, पिथौरागढ़-जाख, पिथौरागढ़-पिपरी, पिथौरागढ़-भागीचौरा, पिथौरागढ़-देवलथल, पिथौरागढ़-झूलाघाट, पिथौरागढ़-राईआगर, पिथौरागढ़-बांस, धारचूला-बरेली, धारचूला-अल्मोड़ा।