चंपावत। चंपावत-टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही अभी भी जोखिम भरी बनी हुई है। एनएच पर कई स्थानों पर बने डेंजर जोन वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। हर रोज इस मार्ग से सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। बारिश के दौरान पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाराकोट ब्लॉक के संतोला के पास पहाड़ी से लगातार हो रहा भूस्खलन सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। बारिश होने पर पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इससे यहां कभी भी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। वाहन चालक जान जोखिम में डालकर इस संवेदनशील स्थान से गुजर रहे हैं। एनएच पर कई अन्य स्थानों पर भी पहाड़ी दरकने और मलबा आने से खतरा बना हुआ है। स्थानीय विजय पांडे ने बताया कि मानसून के दौरान इन स्थानों पर विशेष निगरानी और सुरक्षा के इंतजाम किए जाने जरूरी हैं। उन्होंने संबंधित विभाग से डेंजर जोन में चेतावनी संकेतक लगाने, सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने और भूस्खलन प्रभावित स्थानों का स्थायी समाधान करने की मांग की है। बारिश के दौरान एनएच पर आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखना चुनौती बना हुआ है। चंपावत निवासी अमित गड़ाकोटी में बताया चंपावत जिले के घाट क्षेत्र से लेकर लोहाघाट तक कई जोन ऐसे हैं, जहां पर बारिश होते ही लगातार मलबा गिर रहा है। रात के समय गिरने वाले पत्थरों और मलबे से सबसे बड़ा खतरा है। इसे लेकर सुरक्षात्मक इंतजाम करने जरूरी हैं।
चंपावत से लेकर टनकपुर तक करीब 20 स्थानों पर सुरक्षात्मक कार्य किए जाने हैं, इसकी प्रक्रिया केंद्र राजमार्ग मंत्रालय देहरादून से प्रक्रिया गतिमान है। एनएच पर अन्य डेंजरों को भी चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। -डीएस जरमाल, सहायक अभियंता, एनएच खंड