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Pithoragarh News: भारत-चीन व्यापार शुरू नहीं होने से व्यापारी परेशान

Tue, 11 Jun 2024 11:14 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ। भारत-चीन व्यापार से जुड़े व्यापारियों ने लिपुलेख दर्रे से फिर से व्यापार खोलने की पुरजोर मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि 1992 से वह लगातार व्यापार में शामिल रहे लेकिन 2019 के बाद यह बंद हो गया। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। भारत-तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली ने बताया कि व्यापार बंद होने से उनका करीब 40 लाख का सामान तकलाकोट मंडी में फंसा है। उन्होंने बताया कि चीन ने नेपाल के तिंकर, छांगरू समेत पांच नाकों से व्यापार खोल दिया है। छांगरू के तीन व्यापारी 26 जून को व्यापार के लिए तिब्बत रवाना होंगे। रौंकली ने बताया कि उन्होंने व्यापार खोलने के संबंध में भारत सरकार को 22 आवेदन भेजे हैं।
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पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के समक्ष भी मामले को उठाया गया था। उन्होंने बताया कि व्यापार बंद होते समय उनका सामान प्लाईवुड कवर में संग्रहीत किया गया था। उन्हें नहीं पता कि उनका सामान सुरक्षित भी है या नहीं। कहा कि पिछले पांच वर्षो से 450 से अधिक भारतीयों का सामान वहां पड़ा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 से यहां के व्यापारी पश्चिमी तिब्बत के 45 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं। रौंकली ने कहा कि वार्षिक 1.5 करोड़ रुपये से अधिक व्यापार में व्यापारियों ने भारत सरकार को सीमा शुल्क और अन्य करों के रूप में लाखों रुपये का भुगतान किया है। बकौल रौंकली यदि सरकार व्यापार नहीं खोल सकती है तो उसे व्यापारियों को सामान का मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने इस मामले में सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं किए जाने पर भी नाराजगी जताई।
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गुड़, चीनी ले जाते हैं व्यापारी
पिथौरागढ़। भारत-चीन व्यापार में यहां के व्यापारी तिब्बत को गुड़, चीनी, बांसमिश्री, बिस्किट, बर्तन, सौंदर्य प्रसाधन आदि सामग्री ले जाते हैं। वहां से याक की पूंछ, पशम, जूता, जाकेट, चरू गाय की पूंछ, छिरबी और ऊनी सामग्री लाते हैं। संवाद
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